आधुनिक भारत में राष्ट्रपिता महात्मा गांधी जी ने जिस लोकतंत्र की कल्पना की थी, वह केवल चुनाव, सरकार और सत्ता परिवर्तन तक सीमित नहीं था। उनका मानना था कि लोकतंत्र मे नैतिकता, जनभागीदारी, न्याय, समानता और अधिकार , ग्राम स्वराज और अहिंसा पर आधारित है। आज जब भारतवर्ष बहुत तेजी से बदल रहा है और वैश्विक स्तर पर बहुत सी सामाजिक, आर्थिक तथा राजनीतिक चुनौतियों का सामना कर रहा है, तब गांधीवादी लोकतंत्र की प्रासंगिकता और अधिक बढ़ जाती है। आज जातिवाद का व्यापक प्रभाव है तमाम जातिवादी ग्रुप सरकार और समाज पर तरह-तरह से प्रभाव डाल रहे हैं और अपना अधिकार जमाने की कोशिश कर रहे हैं। आज जातिवाद चरम स्तर पर है। तब गांधी जी की समानता की भावना ही अत्यंत सही प्रतीत होती है।
गांधीवादी लोकतंत्र की मूल भावना मे सत्य और अहिंसा
,जनसहभागिता,ग्राम स्वराज,सामाजिक न्याय,स्वावलंबन और सेवा उनका मानना था कि लोकतंत्र तभी सफल हो सकता है जब जनता जागरूक हो और नैतिक मूल्य हो।
आधुनिक भारत में लोकतंत्र मजबूत होने के बावजूद कई समस्याएं दिखाई देती हैं।राजनीति और प्रशासन में भ्रष्टाचार व्याप्त है। और लोकतंत्र व्यवस्था पर जनता का विश्वास कमजोर हुआ है। लोकतंत्र व्यवस्था पर जनता का विश्वास कमजोर होना एक वह चिंता का विषय है। लोकतंत्र ही भारत की आत्मा है लोकतंत्र को मजबूत करना ही गांधी का व्यापक विचार रहा है उनका मानना था यदि लोकतंत्र मजबूत होगा तो आम आदमी के अधिकार सुरक्षित रहेंगे।
गांवों से पलायन, कृषि और स्थानीय रोजगार की कमी आज भी बहुत बड़ी समस्या है है।
लोकतंत्र मे संवाद के स्थान पर व्यक्तिगत वैमन्य और विचारों का अभाव है। आक्रामक और नफरत देखने को मिल रही है। आज राजनीति के आड़ में तमाम लोग अपनी व्यक्ति के दुश्मनी का भी निपटारा करते हैं। राजनीति में लोक कल्याण की भावना का अभाव सा होता जा रहा है। जबकि गांधी जी की मानना था राजनीतिक मुख्य लोक कल्याण की भावना पर आधारित है।
अमीर और गरीब के बीच बढ़ती दूरी सामाजिक संतुलन बहुत अधिक हुआ है। वर्तमान समय में सामाजिक विभाजन जाति, धर्म और क्षेत्रीय आधार पर बढ़ती कटुता समाज में तनाव उत्पन्न करती है।
ग्राम स्वराज और स्थानीय विकास महात्मा गांधी गांवों को लोकतंत्र की नींव मानते थे। आज भी भारत की बड़ी आबादी गांवों में रहती है।यदि पंचायतों को मजबूत किया जाए और गांवों को आत्मनिर्भर बनाया जाए, तो बेरोजगारी कम हो सकती हैपलायन रुक सकता है। स्थानीय अर्थव्यवस्था मजबूत हो सकती हैगांधीजी का ग्राम स्वराज आज “आत्मनिर्भर भारत” की सोच से भी जुड़ा हुआ है।
राजनीति में नैतिकता की आवश्यकता है। गांधीजी राजनीति को सेवा का माध्यम मानते थे। वह कहते थे की राजनीति के जरिये ही समझ में एक व्यापक बदलाव लाया जा सकता है। वर्तमान समय में जब राजनीति में स्वार्थ और अवसरवादिता की आलोचना होती है, तब गांधीवाद की नैतिकता अत्यंत महत्वपूर्ण हो जाती है। गांधीवादी लोकतंत्र हमें ईमानदारी,पारदर्शिता,जनसेवा, सादगी,जवाबदेही आपसी भाईचारा सहभागिता सिखाता है।
आज समाज में वैचारिक और सामाजिक तनाव बढ़ता दिन प्रतिदिन बढ़ता ही जा रहा है। गांधीजी का अहिंसा और संवाद का मार्ग लोकतंत्र को मजबूत बना सकता है। “विचारों का विरोध हो सकता है, लेकिन मनुष्यों से घृणा नहीं होनी चाहिए।”अहिंसा संस्कृति को सभ्य और मानवीय बनाती है। गांधीजी समाज के अंतिम व्यक्ति के उत्थान को सबसे महत्वपूर्ण मानते थे। उनका “सर्वोदय” का सिद्धांत आज भी प्रासंगिक है।
गांधीवादी मानते थे कि दलित, पिछड़े और कमजोर, वंचित वर्गों को समान अवसर मिले।महिलाओं को भी समान अधिकार मिलना चाहिए। सभी वर्गों को समान अवसर प्राप्त हो। आज के युवा परिवर्तन की शक्ति हैं। गांधीवाद युवाओं को नेतृत्व,सामाजिक सेवा,नैतिक जीवन,राष्ट्र निर्माण, शांति और सद्भाव की प्रेरणा देते हैं।
आज के तकनीकी और डिजिटल युग में गांधीवादी सिद्धांत प्रासंगिक हैं। आधुनिक समय में सोशल मीडिया के दौर में गांधी जी के विचारों को बहुत ही प्रासंगिकता से चित्रों के माध्यम से दर्शाया जाता है। सोशल मीडिया के जरिए गांधी जी के विचार बहुत तेजी से आम जनमानस में प्रचलित और लोकप्रिय हो रहे हैं। लोग गांधीजी के विचारों को जान और आत्मसात कर रहे हैं। गांधी के विचार सत्य,अहिंसा,प्रेम,नैतिकता,मानव कल्याण और समाज सुधारो को इंगित करते हैं। जो कि सोशल मीडिया के माध्यम से आम जनमानस के पास बहुत ही सुगमता से पहुंच जाते हैं। सादगीपूर्ण जीवन,मानवता और संवेदनशीलता गांधीवादी सोच को और महत्वपूर्ण बनाते हैं।
महात्मा गांधी का लोकतंत्र केवल सत्ता प्राप्ति का साधन नहीं, बल्कि आधुनिक समाज निर्माण का मार्ग है। आधुनिक भारत में लोकतंत्र को मजबूत, नैतिक मूल्यों को समावेशी बनाने के लिए गांधीवादी विचार आज भी बहुत ही प्रासंगिक हैं।
यदि भारत को सामाजिक सद्भाव, आर्थिक न्याय और नैतिक राजनीति की दिशा में आगे बढ़ना है, तो गांधीजी के सत्य, अहिंसा, ग्राम स्वराज और सेवा के सिद्धांतों को व्यवहार में लाना ही होगा। गांधी जी के विचार हमेशा प्रासंगिक है और रहेंगे।
– राजीव रत्न राजवंशी एडवोकेट (लेखक)









