ब्यूरो रिपोर्ट/
टीकमगढ़ बल्देवगढ़। जनपद पंचायत बल्देवगढ़ में लेखा अनियमितताओं का मामला अब गंभीर प्रशासनिक प्रश्न बन गया है। सीएम हेल्पलाइन से शुरू हुआ यह मामला अब मुख्यमंत्री कार्यालय, पंचायत राज संचालनालय भोपाल और जिला पंचायत तक पहुंच चुका है, लेकिन तीन-तीन स्तर से आदेश जारी होने के बावजूद जमीनी कार्रवाई अब तक ठप दिखाई दे रही है।
तीन स्तर के आदेश, फिर भी सिस्टम मौन
दस्तावेज बताते हैं कि पहले जिला पंचायत द्वारा जांच के निर्देश दिए गए। इसके बाद पंचायत राज संचालनालय भोपाल ने भी स्पष्ट रूप से कार्रवाई कर रिपोर्ट मांगी। वहीं मुख्यमंत्री कार्यालय से भी शिकायत पर आवश्यक कार्यवाही कर अवगत कराने के निर्देश जारी हुए।
इसके बावजूद स्थिति जस की तस बनी हुई है—न जांच पूरी, न जिम्मेदारी तय।
भुगतान प्रक्रिया पर सवाल, बिल अटके—शिकायतें बरकरार
मामले में आरोप है कि स्वीकृत भुगतान को रोका गया और बिलों को जिला कोषालय भेजने में देरी की गई। इससे संबंधित पक्षों को आर्थिक नुकसान हुआ और मामला सीएम हेल्पलाइन तक पहुंचा।
दस्तावेजों में भुगतान आदेश और वास्तविक प्रक्रिया के बीच अंतर को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं।
लेखा प्रभार और कार्यप्रणाली पर उठे गंभीर प्रश्न
शिकायतों में यह भी उल्लेख किया गया है कि लेखा प्रभार दिए जाने की प्रक्रिया को लेकर आपत्तियां दर्ज की गई थीं। साथ ही सेवा शर्तों, वेतन निर्धारण और कार्यकाल में किए गए भुगतानों की वैधता पर भी सवाल खड़े किए गए हैं।
कुछ मामलों में पोर्टल रिकॉर्ड के आधार पर भी अनियमितता के आरोप लगाए गए हैं, जिनकी पुष्टि जांच के बाद ही संभव होगी।
न्यायालयीन आदेशों के पालन पर भी असमंजस
प्रकरण से जुड़े एक न्यायालयीन मामले में दिए गए निर्देशों के अनुपालन को लेकर भी स्पष्ट स्थिति सामने नहीं आ पाई है। इससे यह सवाल और गहरा हो गया है कि आखिर आदेशों का पालन किस स्तर पर अटक रहा है।
रिटायरमेंट नजदीक, कार्रवाई पर बढ़ा दबाव
स्थानीय स्तर पर यह चर्चा तेज है कि मामले से जुड़े जिम्मेदार अधिकारी/कर्मचारी के सेवानिवृत्त होने से पहले जांच पूरी कर कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
जनता का साफ कहना है—अगर समय रहते निर्णय नहीं हुआ, तो पूरा मामला कागजों में दबकर रह जाएगा।
प्रशासन की साख दांव पर, अब फैसला जरूरी
लगातार उच्च स्तर से निर्देश आने के बाद यह मामला अब सिर्फ एक शिकायत नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम की जवाबदेही का मुद्दा बन चुका है।
अब देखना यह है कि जांच निष्पक्ष और समयबद्ध होती है या फिर यह मामला भी फाइलों के ढेर में दबकर रह जाएगा।









