Unnao News: गविष्ठि (गो-रक्षार्थ धर्मयुद्ध) यात्रा के अंतर्गत उत्तराम्नाय ज्योतिष्पीठाधीश्वर, जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानन्द सरस्वती का हफीजाबाद बांगरमऊ स्थित बाबा बलखण्डेश्वर (परशुराम) मंदिर परिसर में भव्य एवं ऐतिहासिक स्वागत किया गया। हजारों श्रद्धालुओं की उपस्थिति में आयोजित इस कार्यक्रम ने गौरक्षा एवं सामाजिक समरसता का सशक्त संदेश दिया।
शंकराचार्य की गविष्ठि यात्रा का सर्वप्रथम आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे स्थित बांगरमऊ में भव्य स्वागत किया गया। यहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु, संतजन एवं सामाजिक कार्यकर्ता सैकड़ों वाहनों के साथ उपस्थित रहे। स्वागत के उपरांत गविष्ठि यात्रा सैकड़ों वाहनों के विशाल काफिले के साथ बाबा बलखण्डेश्वर (परशुराम) मंदिर, हफीजाबाद के लिए रवाना हुई। पूरे मार्ग श्रद्धालुओं ने पुष्पवर्षा, जयघोष एवं भगवा ध्वजों के साथ पूज्य स्वामी जी का अभिनंदन किया। सैकड़ों गाड़ियों के इस भव्य काफिले ने गविष्ठि यात्रा की शोभा को और अधिक भव्य एवं ऐतिहासिक बना दिया। मंदिर परिसर में पूज्य शंकराचार्य के आगमन पर श्रद्धालुओं ने जोरदार जयघोष के साथ उनका स्वागत किया, जिससे सम्पूर्ण वातावरण भक्तिमय एवं धर्ममय हो उठा।
कार्यक्रम का शुभारंभ वैदिक मंत्रोच्चार के मध्य पादुका पूजन से हुआ। कार्यक्रम के आयोजक डॉ. शशांक शेखर शुक्ला एवं संयोजक आचार्य पं. ऋषिकांत मिश्रा शास्त्री ने जगद्गुरु शंकराचार्य की पादुकाओं का विधिवत पूजन कर उनका आशीर्वाद प्राप्त किया। तत्पश्चात माल्यार्पण एवं अंगवस्त्र अर्पित कर उनका स्वागत एवं अभिनंदन किया।
मंच का संचालन ऋषि वैभव प्रबल ने किया, जबकि सुनील द्विवेदी ने उपस्थित जनसमूह को संबोधित करते हुए गविष्ठि यात्रा के उद्देश्य एवं गौसंरक्षण के महत्व पर अपने विचार व्यक्त किए।
अपने ओजस्वी एवं प्रेरणादायी प्रवचन में पूज्य शंकराचार्य ने कहा कि गौमाता भारतीय संस्कृति, सनातन परंपरा और राष्ट्रजीवन की आधारशिला हैं। उन्होंने समस्त हिंदू समाज से गौरक्षा को जनआंदोलन का स्वरूप देने, गौसेवा को जीवन का दायित्व मानने तथा अपने-अपने सामाजिक एवं धार्मिक कर्तव्यों का निष्ठापूर्वक पालन करने का आह्वान किया।
उन्होंने वर्तमान सरकार की गौसंरक्षण संबंधी नीतियों पर प्रश्न उठाते हुए कहा कि सरकार के पास अभी भी अंतिम अवसर है। यदि वह जनता का विश्वास बनाए रखना चाहती है और सत्ता में बने रहना चाहती है तो गौमाता को राष्ट्रमाता घोषित करे। अन्यथा सत्ता का अहंकार स्वयं उसके विनाश का कारण बन सकता है। उन्होंने कहा कि गौमाता को राष्ट्रमाता का सम्मान देना करोड़ों भारतीयों की आस्था का सम्मान होगा।
प्रवचन के उपरांत शंकराचार्य ने परशुराम मंदिर में भगवान परशुराम का पूजन एवं माल्यार्पण किया तथा मंदिर परिसर में स्थित हजारों वर्ष प्राचीन वटवृक्ष की परिक्रमा कर भारतीय सनातन संस्कृति की अखंड परंपरा के संरक्षण का संदेश दिया।
कार्यक्रम की सबसे उल्लेखनीय विशेषता यह रही कि इसमें केवल हिंदू समाज ही नहीं, बल्कि मुस्लिम समाज के अनेक लोगों ने भी सहभागिता करते हुए गौमाता को राष्ट्रमाता का दर्जा दिए जाने के समर्थन में अपनी सहमति जतायी। यह दृश्य सामाजिक सद्भाव, राष्ट्रीय एकता एवं साझा सांस्कृतिक विरासत का प्रेरक उदाहरण बना।
कार्यक्रम में क्षेत्र के हजारों श्रद्धालुओं एवं नागरिक शामिल हुए। प्रमुख रूप से राजीव बाजपेई, पूर्व विधायक बदलू खाँ, संदीप दीक्षित, पवन गुप्ता, डॉ. मुन्ना अल्वी, रामपाल कुशवाहा, मनीष तिवारी, अनुज कुमार दीक्षित सहित अनेक गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।
कार्यक्रम की व्यवस्थाओं को सफल बनाने में शैलेंद्र शुक्ला (पूर्व अध्यक्ष बार एसोसिएशन उन्नाव) ने अहम भूमिका निभाई तथा व्यवस्थापक समिति के प्रतीक मिश्रा, पीयूष मिश्रा एवं नितिन कुमार सहित सभी कार्यकर्ताओं ने अपनी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियों का कुशलतापूर्वक निर्वहन किया। उनके उत्कृष्ट प्रबंधन एवं हजारों श्रद्धालुओं की सक्रिय सहभागिता से कार्यक्रम अत्यंत सफल एवं ऐतिहासिक रूप से संपन्न हुआ।
अंत में उपस्थित जनसमूह ने गौ-संरक्षण, सामाजिक समरसता एवं भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों के संरक्षण का संकल्प लिया तथा गविष्ठि यात्रा के उद्देश्य को जन-जन तक पहुंचाने का आह्वान किया।
… रिपोर्ट- अनिल कुमार यादव











