वर्क फ्रॉम होम के नाम पर दिल्ली जाकर समान कंपनी शुरू करने का आरोप। डेटा चोरी व विश्वासघात समेत कई गंभीर मामले
।। मुंबई में कार्यरत कंपनी कलर पेपर्स इंडिया प्राइवेट लिमिटेड में कर्मचारी द्वारा धोखाधड़ी, विश्वासघात, गोपनीय डेटा की चोरी, कंपनी संपत्ति के दुरुपयोग और समानांतर प्रतिस्पर्धी व्यवसाय चलाने का कम्पनी के मैनेजिंग डायरेक्टर व ब्रांच मैनेजर ने युवक पर लगाया आरोप। कंपनी के अनुसार, अजीत कुमार सिंह (पूर्व में अजीत कुमार यादव), पुत्र अशोक कुमार यादव, निवासी गौरा कला, कनिगांव,जनपद उन्नाव वर्ष 2019 से कंपनी के घर/प्रिमाइसेज़ में रहकर नियमित वेतन प्राप्त कर रहा था, और इसी दौरान उसे कंपनी के गोपनीय व्यावसायिक रिकॉर्ड, वेंडर नेटवर्क और आंतरिक प्रक्रियाओं तक पूर्ण पहुंच दी गई थी।
कंपनी का आरोप है कि संबंधित कर्मचारी ने वर्क फ्रॉम होम का बहाना बनाकर दिल्ली स्थानांतरित होने के बाद, नौकरी में रहते हुए ही वर्ष 2023 से अपने रिश्तेदारों और कुछ कंपनी वेंडर्स के साथ मिलकर समान प्रकृति की एक प्रतिस्पर्धी कंपनी शुरू कर दी। आरोप है कि इस दौरान कंपनी के गोपनीय डेटा, क्लाइंट वेंडर जानकारी और कार्यप्रणाली का दुरुपयोग किया गया, जिससे कंपनी को आर्थिक, व्यावसायिक और प्रतिष्ठात्मक नुकसान पहुंचा।
इसके अतिरिक्त, आरोप है कि कर्मचारी ने कंपनी की संपत्ति (लैपटॉप एवं चार्जर) अपने पास रखी और अधिकृत प्रक्रिया के बिना उसका उपयोग किया। मामला सामने आने के बाद कंपनी द्वारा संपर्क करने पर संबंधित व्यक्ति ई-मेल के माध्यम से सक्रिय पाया गया और कंपनी की संपत्ति लौटाने के संबंध में तत्काल उत्तर भी दिया, जिससे उसके “लापता” होने के दावे पर सवाल खड़े हो गये।
कंपनी का यह भी कहना है कि मामले के उजागर होने के बाद दबाव बनाने और जांच को प्रभावित करने के उद्देश्य से काउंटर शिकायतें दर्ज कराई गईं। कंपनी के अनुसार, जब उसके प्रतिनिधि आरोपी युवक के गांव पहुंचे, तो उन्होंने युवक के बारे मे या उसके व्यवसाय के बारे पूछताछ की जिसपर आरोपी युवक के परिजन कंपनी के कर्मचारीयों के साथ भीड़ गये और उन्हे कई झूठे मुकदमों मे फ़साने की धमकी दे डाली।
कर्मचारियों ने थाने मे तहरीर देते हुए आरोप लगाया कि आरोपी की मां द्वारा असिवन थाना, उन्नाव में गलत तथ्यों के आधार पर शिकायत दी गई।
इसके बाद असिवन थाना, उन्नाव से कंपनी के अधिकृत प्रतिनिधि को थाने बुलाया गया, इसके बाद ही वे थाने पहुंचे।
कर्मचारियों ने प्रार्थना पत्र मे लिखा कि थाने पहुंचने पर उन्हें बिना किसी पूर्व लिखित नोटिस के लगभग तीन घंटे तक थाने में बैठाए रखा गया। कंपनी का आरोप है कि थाने में मौजूदगी के दौरान कथित रूप से अभद्र भाषा का प्रयोग किया गया तथा कंपनी के अधिकृत प्रतिनिधि से दो दस्तावेज़ों पर हस्ताक्षर कराए गए, जबकि पूरी प्रक्रिया की स्पष्ट जानकारी नहीं दी गई।
कंपनी का यह भी कहना है कि बाद में आरोपी कर्मचारी के पिता से यह कथन किया गया कि “जितना करना था, उतना कर दिया गया है”, जिससे पूरी कार्यवाही की निष्पक्षता और पारदर्शिता पर प्रश्नचिह्न खड़े होते हैं।
कंपनी की ओर से इस पूरे मामले में पुलिस शिकायत दर्ज कराई जा चुकी है। कंपनी का कहना है कि उसके पास 2019 से वेतन रिकॉर्ड, ई-मेल संवाद, डिजिटल डेटा, वीडियो रिकॉर्डिंग और अन्य साक्ष्य उपलब्ध हैं। कंपनी ने मामले की निष्पक्ष, पारदर्शी और उच्चस्तरीय जांच की मांग की है।
रिपोर्टः आशीष कुमार











