Uttar Pradesh: योगी सरकार की बुलडोजर नीति का डंका पूरे प्रदेश में बजता है। अपराधियों पर बुलडोजर चलाने और एनकाउंटर करने के किस्से हर नुक्कड़ पर चर्चित हैं। लेकिन, उदयभान करवारिया की रिहाई के बाद होने वाले उपचुनाव से पहले सरकार की इस नीति पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
1996 में सपा विधायक जवाहर यादव की हत्या के मामले में 2019 में सजायाफ्ता उदयभान को मिली आजीवन कारावास की सजा के बावजूद उनकी रिहाई एक अलग कहानी कहती है। जनता सोच में है कि आखिर इस बुलडोजर नीति का सच क्या है? क्या बुलडोजर सिर्फ विपक्ष और विरोधियों के लिए है और भाजपा के बड़े-बड़े अपराधी चुनावी मैदान में खुल्लम-खुल्ला घूम सकते हैं?

बुलडोजर की नीति से अगर सच में अपराध खत्म होते तो आज उदयभान करवारिया जेल की सलाखों के पीछे होते, ना कि चुनावी रण में। योगी जी के बुलडोजर ने इस बार खुद ही खुद को सवालों के घेरे में ला खड़ा किया है। आखिरकार, अपराधियों पर बुलडोजर चलाना एक बात है, और चुनावी फायदे के लिए उन्हीं अपराधियों को रिहा करना दूसरी बात।
अब देखना होगा कि जनता इस बुलडोजर के भ्रमजाल में फंसती है या असलियत को पहचान कर अपना फैसला करती है। योगी सरकार की इस नीति पर सवाल उठाना लाजिमी है, क्योंकि बुलडोजर की धमक और असलियत का फर्क जनता अब समझने लगी है।