जिला ब्यूरो/मनोज सिंह
टीकमगढ़। महिला एवं बाल विकास विभाग ने बल्देवगढ़ बाल विकास परियोजना अधिकारी महेश दोहरे को शासकीय कार्यों में लापरवाही, नियमों के विपरीत प्रक्रिया अपनाने और शिकायतकर्ता पर कथित दबाव बनाने के मामले में तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। निलंबन आदेश 19 अगस्त 2026 को जारी किया गया।
विभागीय आदेश के मुताबिक, बल्देवगढ़ में एक नियुक्ति प्रक्रिया के दौरान ग्राम स्तर पर सार्वजनिक सूचना जारी नहीं करने और पात्र आवेदकों को अवसर नहीं देने की शिकायत सामने आई थी। विभाग ने प्रथम दृष्टया इसे नियमों के विपरीत प्रक्रिया माना।
इसके साथ ही परियोजना अधिकारी को हर माह कम से कम 12 दिन भ्रमण कर 24 आंगनबाड़ी केंद्रों का निरीक्षण करना था। अप्रैल और मई 2026 में कुल 48 निरीक्षणों के लक्ष्य के मुकाबले केवल 17 निरीक्षण किए गए, जो निर्धारित लक्ष्य का करीब 35 प्रतिशत रहा। जिला कार्यक्रम अधिकारी के निरीक्षण में मिली कमियों पर समय-सीमा में पालन प्रतिवेदन भी प्रस्तुत नहीं किया गया।
मामले में सोशल मीडिया पर सामने आए एक वीडियो ने भी विवाद को गंभीर बना दिया। विभागीय जांच के अनुसार, शिकायतकर्ता अशोक तन्मय छक्कीलाल निवासी खुड़ो नजरदारी ने सीएम हेल्पलाइन पर आंगनबाड़ी केंद्र से संबंधित शिकायत की थी। आरोप है कि शिकायत बंद कराने के लिए उन पर दबाव बनाया गया। आदेश में वीडियो में शिकायतकर्ता से आपत्तिजनक तरीके से बातचीत किए जाने का भी उल्लेख है।
इन आरोपों को शासकीय कार्य में घोर लापरवाही और स्वेच्छाचारिता मानते हुए महिला एवं बाल विकास विभाग की आयुक्त निधि निवेदिता ने मप्र सिविल सेवा नियम-1966 के नियम-9 के तहत महेश दोहरे को निलंबित कर दिया। निलंबन अवधि में उनका मुख्यालय संभागीय संयुक्त संचालक, महिला एवं बाल विकास, सागर संभाग रहेगा।
कार्रवाई पर निलंबित अधिकारी ने उठाए सवाल
वहीं निलंबित परियोजना अधिकारी महेश दोहरे ने कार्रवाई को एकतरफा बताया है। उनका कहना है कि न तो वीडियो की जांच कराई गई और न ही उन्हें अपना पक्ष रखने के लिए नोटिस दिया गया। उन्होंने कार्रवाई की निष्पक्ष जांच की मांग की है।
अब पूरे मामले में विभागीय कार्रवाई के साथ-साथ यह सवाल भी उठ रहा है कि शिकायत, वीडियो और लगाए गए आरोपों की जांच किस स्तर पर हुई और संबंधित अधिकारी को अपना पक्ष रखने का पर्याप्त अवसर मिला या नहीं।











