राजीव रत्न राजवंशी ने कहा कि उत्तराखंड के हल्द्वानी में राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे जी की सभा जिस स्थान पर हुई थी, उस मंच का कथित रूप से ‘शुद्धिकरण’ किया जाना अत्यंत घृणित और निंदनीय है।
राजीव रत्न राजवंशी ने कहा कि यह सिर्फ मल्लिकार्जुन खरगे जी का नहीं, बल्कि पूरे देश के दलित समाज का अपमान है। यह कृत्य न केवल एक व्यक्ति का अपमान है, बल्कि हमारे संविधान, लोकतंत्र और सामाजिक समरसता पर सीधा हमला है। संविधान हमें बराबरी का हक़ देता है, लेकिन जातिवादी सोच आज भी व्यक्ति का ओहदा नहीं, उसकी जाति देखती है।
खड़गे जी के बयान के बाद मैदान धोने वाली मानसिकता यह साबित करती है कि छुआछूत मिटा नहीं, बल्कि नए रूप में सामने आ गया है। आम इंसान के आत्मसम्मान की लड़ाई अभी बहुत लंबी है।
भारत का संविधान हमें समानता का अधिकार देता है। जाति के नाम पर किसी का अपमान करना न सिर्फ अमानवीय है बल्कि कानूनन अपराध भी है। जातिगत अपमान बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।जाति के आधार पर अपमान करने वाले लोग सिर्फ एक व्यक्ति का नहीं, पूरे देश के भाईचारे का अपमान करते हैं।
नफ़रत फैलाने वाले तत्वों के इस कुकर्म पर कोई आश्चर्य नहीं है। क्योंकि आज उत्तराखंड में भी ऐसे नफ़रती सोच में डूबे लोगों की कमी नहीं है, जो देश को बांटने का काम कर रहे हैं। मल्लिकार्जुन खरगे जी का अपमान भारत की मूल सद्भावना का अपमान है। यह भारत के संविधान की भी अपमान है जिसकी मूल भावना है समता समानता और न्याय है।
राजीव रतन राजवंशी ने कहा कि आजादी इतने वर्षों के बाद भी छुआ छूत और भेदभाव की ऐसी सोच का होना समाज के लिए अत्यंत चिंता का विषय है। आज भी ऐसी सोच के लोग व्यक्ति जिंदा है जो व्यक्ति अपमान जाति के आधार पर करते हैं। समाज में ऐसे कार्य करने वाले लोगों की निंदा होनी चाहिए और उनका सामाजिक बहिष्कार होना चाहिए।
इस नफरती कार्य से देश के करोड़ों दलितों,वंचितों और सामाजिक न्याय में विश्वास रखने वाले लोगों का अपमान हुआ है।
समानता, सम्मान और सामाजिक न्याय के लिए यह अत्यंत तक घातक है नफरती लोगों की सोच को कामयाब होने नहीं दिया जाएगा।
श्री राजवंशी ने इस घटना की घोर निंदा करते हुए सरकार से मांग की कि दोषियों के खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई तत्काल की जाए।











