Delhi: राजधानी दिल्ली में संसद सत्र के बीच राजनीतिक माहौल लगातार गर्म बना हुआ है। विपक्षी दल सरकार को कई मुद्दों पर घेरने की कोशिश कर रहे हैं। इसी बीच समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और कन्नौज से सांसद अखिलेश यादव ने केंद्र सरकार और भारतीय जनता पार्टी पर तीखा हमला बोला। संसद परिसर में मीडिया से बातचीत के दौरान उन्होंने कहा कि “इससे बड़ा अहंकार क्या हो सकता है…”। उनके इस बयान के बाद राजनीतिक गलियारों में नई बहस शुरू हो गई है।
अखिलेश यादव ने कहा कि लोकतंत्र में सरकार का काम विपक्ष की बात सुनना होता है, लेकिन अगर जनता के सवालों और विपक्ष की आवाज को लगातार नजरअंदाज किया जाए, तो यह लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए अच्छा संकेत नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार हर मुद्दे पर विपक्ष को बोलने का पूरा अवसर नहीं देती और जनता से जुड़े सवालों पर जवाब देने से बचती है। उनके मुताबिक लोकतंत्र संवाद से चलता है, टकराव से नहीं।
इसी दौरान संसद से जंतर-मंतर तक विपक्षी सांसदों ने विरोध मार्च भी निकाला। समाजवादी पार्टी की सांसद डिंपल यादव समेत कई नेताओं ने इस मार्च में हिस्सा लिया। प्रदर्शन के दौरान विपक्षी नेताओं ने सरकार के खिलाफ नारे लगाए और विभिन्न मुद्दों पर अपनी नाराजगी जताई। समाजवादी पार्टी का कहना है कि वह जनता के हितों से जुड़े मुद्दों को संसद और सड़क दोनों जगह मजबूती से उठाती रहेगी।
अखिलेश यादव ने अपने बयान में यह भी कहा कि जनता सब कुछ देख रही है और आने वाले समय में वही फैसला करेगी। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में जनता सबसे बड़ी ताकत होती है और सरकार को जनता की समस्याओं पर गंभीरता से काम करना चाहिए। उन्होंने महंगाई, बेरोजगारी, किसानों और युवाओं से जुड़े मुद्दों का भी जिक्र किया और कहा कि इन विषयों पर सरकार को जवाब देना चाहिए।
वहीं, भारतीय जनता पार्टी की ओर से विपक्ष के आरोपों को खारिज किया गया। बीजेपी नेताओं का कहना है कि सरकार संसद में हर मुद्दे पर चर्चा के लिए तैयार है और विपक्ष केवल राजनीतिक माहौल बनाने की कोशिश कर रहा है। उनका कहना है कि सरकार विकास कार्यों और जनकल्याण की योजनाओं पर लगातार काम कर रही है तथा विपक्ष बेवजह विवाद खड़ा कर रहा है।
फिलहाल संसद के अंदर और बाहर राजनीतिक बयानबाजी तेज है। एक ओर विपक्ष सरकार पर सवाल उठा रहा है, तो दूसरी ओर सरकार अपने कामकाज का बचाव कर रही है। आने वाले दिनों में संसद सत्र के दौरान यह राजनीतिक टकराव और तेज हो सकता है। अब देखना होगा कि इन मुद्दों पर संसद में क्या चर्चा होती है और सरकार तथा विपक्ष के बीच आगे क्या रुख अपनाया जाता है।











