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Monday, September 26, 2022
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उन्नाव: दसवे दिन निकला ताजिया जुलूस, कर्बला के शहीदों को याद कर मनाया मातम

उन्नाव । मोहर्रम में नगर एवं क्षेत्र में इमामबाड़ो तथा इमाम चौकों पर ताजिये रखकर बिजली की रंग बिरंगी झालरो से आकर्षक सजावट की गई । इमामबाड़ो की ओर जाने वाले सभी रास्तो और गलियों में भी रोशनी कर बेहतरीन सजावट की गई ।

इमामबाड़ो की सजावट और ताजियों की ज़ियारत के लिए अकीदतमंदों की भारी भीड़ उमड़ी । नगर के मोहल्ला दरगाह शरीफ , पुरबिया टोला , मुकरियाना , किला शाह जी , भटपुरी , सराय पंजाबी टोला , मेमारन टोला , सरायं, आदि मोहल्लों में स्थित इमामबाड़ो तथा इमाम चौको पर भव्य सजावट की गई । इसी तरह कस्बा गंज मुरादाबाद ग्रामीण क्षेत्र में सुरसैनी , आस त , भठिया पुर व अतर धनी सितलगंज , आदि में भी आकर्षक सजावट की गई । हालांकि ग्राम सुरसेनी में की जाने वाली सजावट को देखने नगर और क्षेत्र ही नहीं बल्कि गैर जनपद से भी जायरीन आते । इस मौके पर दरगाह मीर सय्यद अलाउद्दीन मीरा शाह बाबा के सदर सय्यद मोहम्मद गयासुद्दीन गौसी मियां ने बताया 10 मुहर्रम 61 हिजरी (610 ई) को करबला के मैदान में इमाम हुसैन को यजीदों ने शहीद कर दिया था । हजरत हुसैन ने यजीद के साथ जो जंग लड़ी, उसका मकसद सत्ता या सिंहासन प्राप्त करना नहीं था, बल्कि इस्लाम धर्म के उसूल के खिलाफ समाज को गलत राह दिखाने वालों का मुखर होकर विरोध करना था । हजरत इमाम हुसैन ने यजीद की गलत नीतियों और समाज के खिलाफ किए जा रहे हैं कुकृत्य को मानने से इन्कार कर दिया था । उन्होंने बताया कि

हजरत इमाम हुसैन ने यजीद को यह समझाने की हर मुमकिन कोशिश की कि वादे के मुताबिक वह खुद को खलीफा घोषित न करे और तमाम मुसलमानों से सलाह-मशवरा के बाद कोई फैसला लिया जाए ।हालांकि नबी के नवासे इमाम हुसैन के तमाम दलीलों और इस्लाम के उसूलों को मानने से इन्कार करते हुए यजीद अपनी मनमानी पर उतारू था । उन्होंने बताया कि हजरत इमाम हुसैन का मकसद जंग करना नहीं था । हजरत इमाम हुसैन अपने परिवार के कुनबे के साथ उस पवित्र जगह को छोड़कर दूसरी जगह जाने के लिए तैयार थे, लेकिन रास्ते में यजीद के लोगों ने उन्हें घेर लिया । हजरत इमाम हुसैन का जंग करना मकसद होता, तो वे अपने साथ लश्कर लेकर निकलते । इतिहास गवाह है कि हजरत इमाम हुसैन के साथ उनके खानदान के लोग और कुछ अन्य सहयोगी थे जिनकी तादाद केवल 72 थी और जिनमें औरतें व बच्चे भी शामिल थे जिन्हें शहीद कर दिया गया था । उन्ही शहीदाने कर्बला की याद में मुहर्रम मनाया जाता है ।

आज पूरे हुवे मोहरम के दस दिन वही लोगो ने किया जुलूस और मातम का आयोजन और ए. बी. नगर इस्थित जामा मस्जिद में जोहर की नमाज़ अदा करने के बाद कई मौलाना और हाफ़िज़ शाहब ने नात और बयानो का आहतरम पेश किया और लोगो को हसन और हुसैन के बारे में जान कारी भी दी। और रोज दारो के लिए रोज़ा खोलने का भी इंतजाम किया गया।रोज दारो ने रोजा खोला और मगरिब की नमाज़ अदा कर के अल्लाह का शुक्र अदा किया।

 

TV भारत/TPN न्यूज़ नेटवर्क

 

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