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Monday, August 15, 2022
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अपने ही मुल्क में अजनबी बना दिया: मौलाना महमूद मदनी

नफरत और संप्रदायिकता का जवाब उसी की भाषा में नहीं दिया जा सकता, देश के माहौल को बदलने की कोशिश की जा रही है।

उलमा के निशाने पर संघ और सरकार, नसीहत दी तो चेताया भी देवबंद (सहारनपुर)।जमीयत उलमा-ए-हिंद के राष्ट्रीय अधिवेशन में सीधे नाम तो नहीं लिया लेकिन संघ और सरकार उलमा के निशाने पर रही। नसीहत दी गई तो साथ ही चेताया भी गया। संबोधन के दौरान मौलाना महमूद मदनी ने कहा कि अपने ही मुल्क में अजनबी बना दिए गए हैं। हमारे पूर्वजों ने देश को आजाद कराने में बड़ी कुर्बानियां दी हैं। हम सांप्रदायिक शक्तियों को देश की अस्मिता से खिलवाड़ नहीं करने देंगे।

अधिवेशन में पूर्व राज्यसभा सांसद मौलाना महमूद मदनी ने कहा कि मुसलमानों को अतिवाद और तीव्र प्रतिक्रिया से बचना चाहिए। आग को आग से नहीं बुझाया जा सकता। इसलिए सांप्रदायिकता और नफरत का जवाब नफरत नहीं हो सकता। इसका जवाब प्रेम और सद्भाव से दिया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि घर को बचाने और संवारने के लिए कुर्बानी देने वाले और होते हैं और माफीनामा लिखने वाले और होते हैं। दोनों में फर्क साफ होता है और दुनिया ये फर्क देख सकती है कि किस प्रकार माफीनामा लिखने वाले फासीवादी सत्ता के अहंकार में डूबे हुए हैं। देश को तबाही के रास्ते पर ले कर जा रहे हैं। मौलाना मदनी ने सवाल खड़ा किया कि देश की एकता और अखंडता व अखंड भारत बनाने की बात करने वालों ने आज देश के मुसलमानों का रास्ते पर चलना मुश्किल कर दिया है, यह किस अखंडता और अखंड भारत की बात करते हैं? यह नफरती लोग देश के साथ दुश्मनी कर रहे हैं और देश के अमन शांति, यहां की गंगा-जमुनी तहजीब और एकता, अखंडता को तबाह, बर्बाद कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि हमें सबसे ज्यादा प्यार इस देश की शांति से है। नफरत की दुकान खोलने वाले और नफरत का बाजार सजाने वाले लोग देश के दुश्मन हैं।

उन्होंने कहा कि जमीयत उलमा-ए-हिंद भारत के मुसलमानों की दृढ़ता का प्रतीक है, यह सिर्फ मुसलमानों तक ही सीमित नहीं है, बल्कि यह देश का संगठन है। उन्होंने कहा कि सांप्रदायिक नफरत को दूर करना मुसलमानों से कहीं अधिक सरकार और मीडिया की जिम्मेदारी है। इससे पूर्व जमीयत के पदाधिकारियों ने देश और समाज के मुद्दों पर प्रस्ताव पेश किए, जिनका अनुमोदन भी किया गया। इन प्रस्तावों के जरिये देश की समस्याओं के समाधान के लिए एक रूपरेखा देने का प्रयास किया गया। संवाद

मंच पर भावुक हुए मौलाना महमूद मदनी

देवबंद। अधिवेशन में भाषण शुरू करने मंच पर पहुंचे मौलाना महमूद मदनी भावुक हो गए। उन्होंने नम आंखों के साथ संगठन के पूर्व अध्यक्ष दिवंगत मौलाना कारी मोहम्मद उस्मान मंसूरपुरी को याद किया। मौलाना मदनी ने कहा कि यह पहला अवसर है, जब कारी मोहम्मद उस्मान मंसूरपुरी के बिना यह कार्यक्रम करना पड़ा है। हमेशा वो ही जमीयत का झंडा फहराते थे और वही कार्यक्रम की अध्यक्षता करते थे। उनके दुनिया से रुखसत होने से इस्लामिक जगत के साथ ही जमीयत को बहुत बड़ा नुकसान हुआ है। क्योंकि कारी उस्मान ने हमेशा उनका सही मार्गदर्शन किया है।

अधिवेशन में आए सुझाव और प्रस्ताव, आज लगेगी मुहर

– नफरत के बढ़ते दुष्प्रचार को रोकने और इस्लामोफोबिया की रोकथाम

-विभिन्न संप्रदायों के साथ बैठक कर सद्भावना मंच को मजबूत करना

-मजदूर, किसानों, पिछड़े, यतीम, बेवाओं और मजबूर लोगों की मदद करना

– युवाओं को नशे व यौन भटकाव से बचाने के लिए मिलजुलकर प्रयास करना

– संवेदनशील धार्मिक मुद्दों (गोरक्षा, धार्मिक स्थलों लाउडस्पीकर) का समाधान

– सार्वजनिक भूमि के त्योहारों पर इस्तेमाल के विवादों का शांतिपूर्वक समाधान

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