जिला ब्यूरो/मनोज सिंह
टीकमगढ़। जिले में प्रशासनिक संवेदनशीलता और सामाजिक सरोकार का एक प्रेरक उदाहरण सामने आया है, जहाँ गंभीर बीमारी से जूझ रहे एक जरूरतमंद परिवार को समय पर सहायता प्रदान कर मानवीय मूल्यों को सशक्त किया गया। बस स्टैंड के पीछे निवास करने वाले 32 वर्षीय सुनील वाल्मीकि, जो मुँह की गंभीर बीमारी से पीड़ित हैं, आर्थिक रूप से अत्यंत कमजोर स्थिति में हैं। परिवार में तीन छोटी बेटियाँ हैं और बीमारी के कारण वे काम करने में भी असमर्थ हैं।
इस पीड़ादायक स्थिति की जानकारी मातृ पितृ छाया वृद्ध आश्रम की अध्यक्षा श्रद्धा चौहान के माध्यम से सामने आई। जानकारी मिलते ही तत्काल सुनील वाल्मीकि के सभी आवश्यक दस्तावेज एकत्र किए गए और मेडिकल विशेषज्ञों से उनका परीक्षण कराया गया। रिपोर्ट के आधार पर यह पुष्टि हुई कि वे कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से ग्रसित हैं। इसके बाद रोहित पाठक के साथ उनके घर जाकर पारिवारिक और आर्थिक स्थिति का अध्ययन किया गया, जिसमें सामने आया कि जवाहरलाल नेहरू कैंसर हॉस्पिटल में प्रारंभिक प्रक्रिया और जांच के लिए लगभग बारह हजार रुपये की तत्काल आवश्यकता है। आगे का इलाज शासन की आयुष्मान योजना के माध्यम से संभव हो सकता है, लेकिन शुरुआती खर्च परिवार के लिए असंभव था।
यह विषय रेडक्रॉस सोसाइटी के चेयरमैन महेश साहू और प्रबंध कार्यकारिणी के समक्ष रखा गया। पूरी कार्यकारिणी ने बिना किसी विलंब के सहमति जताते हुए मामले को कलेक्टर के संज्ञान में लाने का निर्णय लिया। जैसे ही यह जानकारी जिले के कलेक्टर विवेक श्रोतीय तक पहुंची, उन्होंने तुरंत सहायता के लिए स्वीकृति दी। तत्पश्चात पूरी फाइल तैयार की गई और रेडक्रॉस सोसाइटी के माध्यम से सुनील वाल्मीकि की पत्नी को पंद्रह हजार रुपये का चेक प्रदान किया गया, ताकि प्रारंभिक इलाज में कोई बाधा न आए।
इस अवसर पर परिवार को शीघ्र स्वास्थ्य लाभ की कामना के साथ आगे के इलाज के लिए हौसला दिया गया। साथ ही यह भी स्पष्ट किया गया कि तीनों बच्चियों की शिक्षा से संबंधित हर संभव सहायता व्यक्तिगत स्तर पर किए जाने का प्रयास जारी रहेगा। यह सहायता भले ही इस बड़ी बीमारी के सामने एक छोटा कदम हो, लेकिन यह उस तिनके की तरह है जो बाढ़ के प्रवाह में भी उम्मीद का सहारा बन जाता है।
यह पूरा प्रयास कलेक्टर विवेक श्रोतीय, इंडियन रेड क्रॉस सोसाइटी के अध्यक्ष के रूप में उनकी भूमिका, चेयरमैन महेश साहू और पूरी प्रबंध कार्यकारिणी की सहयोग भावना को दर्शाता है। ऐसे संवेदनशील निर्णय न केवल एक परिवार को राहत देते हैं, बल्कि समाज में यह विश्वास भी मजबूत करते हैं कि प्रशासन और सामाजिक संस्थाएँ आज भी जरूरतमंद के साथ खड़ी हैं।












