Monday, August 8, 2022
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साहब…सुन लईयों फरियाद, टीकमगढ़ को भी दे दो एक खेल सेंटर

जिला ब्यूरो/मनोज सिंह

 

साहब…सुन लईयों फरियाद, टीकमगढ़ को भी दे दो एक खेल सेंटर
उपेक्षा को लेकर नाराजगी, हाथ पर हाथ धरे बैठे है खेल शिक्षक
टीकमगढ़ जिले में खेल की दुर्दशा के लिए जिम्मेदार कौन, क्या जिम्मेदारों पर होगी कार्रवाई

 

टीकमगढ़। जहां शासन और प्रशासन शिक्षा के साथ ही खेलों के महत्व पर जोर दे रहा है, वहीं जिले में खेलों की उपेक्षा ने प्रशासन की मंशा पर सवालिया निशान छोड़ दिये हैं। टीकमगढ़ जिले ने खेलों के क्षेत्र में देश ही नहीं विदेशों में भी अपना परचम फहराया है। यहां की हाकी, साफ्टबाल, खोखो, फुटबाल आदि खेलों में खिलाडिय़ों ने अपनी पहचान बना रखी है, लेकिन कुछ दिनों से खेलों को ग्रहण सा लगता जा रहा है। एक ओर जहां यहां होने वाले टूर्नामेंट एक एक करके समाप्त से होते जा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर खेल प्रतिभाओं की अनदेखी की जाने लगी है। साधनों एवं आयोजनों के अभाव में उनकी हालत खराब होने लगी है। एक ओर जहां प्रदेश में अधिकांश स्थानों को खेल सेंटर उपलब्ध कराये गये हैं, वहीं टीकमगढ़ जिले का इस सुविधा से दूर रखा गया है। यहां साई सेंटर को समाप्त करने की जहां साजिश रची जाती रही है, तो वहीं स्कूलों से भी खेलों को लगभग गायब किया जाने लगा है। इस दिशा में यहां के जनप्रतिनिधियों की उदासीनता चर्चाओं में बनी हुई है। देखा जा रहा है कि यहां होने वाले टूर्नामेंटों को दफन करने की प्रक्रिया जारी है। जो लोगों के बीच नाराजगी का कारण बनी हुई है। जिले में स्कूल शिक्षा विभाग में खेलों की स्थिति काफ ी दयनीय है। जहां पहले 200 से 300 खिलाड़ी राज्य स्तरीय प्रतियोगिताओं में भाग लेते थे, वहीं आज स्थिति कुछ और ही है देखने में आने लगी है। टीकमगढ़ जिले में लगभग 9 खेल शिक्षक व लगभग 20 प्रशिक्षित खेल शिक्षक है । लेकिन जिला क्रीड़ा अधिकारी द्वारा अपने चहेतों को खेल प्रतियोगिता में डियूटी पर बुलाया जाता है, जब कि खेल शिक्षक व प्रशिक्षित खेल शिक्षक खेल मैदान पर दिखाई नहीं देते हैं। यहीं कारण है कि टीकमगढ़ में खेलों का स्तर लगातार गिरता जा रहा है। वहीं जबकि स्कूलों में प्रत्येक छात्र से खेल की शुल्क ली जाती है, स्कूल की ली गई शुल्क का 40 प्रतिशत जिला एवं 15 प्रतिशत राशि संभाग के लिऐ जाती है, फि र भी खेल में टीकमगढ़ काफी पीछे होता जा रहा है। वहीं हाल ही में प्रदेश स्तर से प्रत्येक जिले को खेल सेंटर दिये गये हैं, लेकिन टीकमगढ़ को एक भी सेंटर नहीं मिला है। इसका कारण माना जा रहा है कि या तो टीकमगढ़ से खेल सेंटर की मांग नहीं की गई है या फिर शासन ने जिले की अनदेखी की है। यदि अनदेखी की है तो इसके लिये यहां के जनप्रतिनिधि दोषी है और यदि मांग नहीं की गई है तो प्रशासनिक अधिकारियों की उदासीनता मानी जानी चाहिये। बच्चों के भविष्य से खिलवाड़ करने का यह कोई पहला मामला नहीं है। इसके पूर्व स्कूलों को शासन द्वारा 15-15 हजार रूपये बच्चों के खेल सामग्री व अन्य सामान खरीदने के लिये भेजे गये थे, लेकिन प्राचार्य उस पर कुंडी लगाये बैठे रहे। बच्चों के हितों में राशि भी ठीक से खर्च नहीं कर सके। अनेक प्राचार्यों ने यह राशि शासन को लैप्स हो जाने के कारण वापिस भेजी और शिक्षा विभाग सहित जिला प्रशासन सारा नजारा चुप्पी साधे देखता रहा। शिक्षा विभाग में अधिकारियों की मनमानी और लगातार की जा रही लापरवाही ने शिक्षकों और बच्चों दोनो की परेशानियों को बढ़ा दिया है। स्कूलों का शिक्षा स्तर जहां गिरता जा रहा है, वहीं स्कूलों की खेल-कूंद व्यस्थाएं दम तोडऩे लगी है। आखिर यह सब  क्यों किया जा रहा है, यह शोध का विषय है। बताया गया है कि हाल ही में जिला स्तरीय प्रतियोगिता के लिये लगी डियूटी में जो खेल शिक्षक नहीं हैं, उनकी डियूटी लगा दी गई है, वही खेल शिक्षक हाथ पर हाथ धरे बैठे हैं। यहां बता दें कि खेल शिक्षकों की अनदेखी और खेलों की उपेक्षा ने बच्चों को जिला स्तर तक सीमित करके रख दिया है, जब कि जिले में खिलाडिय़ों की कहीं कोई कमीं नहीं है। यदि देखा जाए तो प्रमोद खरे के शिक्षा विभाग को अलविदा कहने के बाद से आने वाले क्रीड़ा अधिकारी लगातार उदासीनता बरतने में लगे हैं। इस मामले को गंभीरता से लेने की नागरिकों द्वारा जरूरत बताई जा रही है।

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