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Monday, September 26, 2022
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सरकारी दवाओं से घरों पर इलाज करने वाले डाक्टर पर अब नहीं हुई एफआईआर

छापामार कार्रवाई के बाद भी बरती जा रही ढील, चर्चाओं का दौर जारी

मनोज सिंह/जिला ब्यूरो

टीकमगढ़। बीते दिनों नगर पंचायत क्षेत्र कारी में अपने घर पर सरकारी दवाएं मरीजों को देने वाले फर्जी डाक्टर के रंगे हाथों पकड़े जाने के बाद भी अब तक आरोपी पर एफआईआर तक न होने से ग्रामीणों में अटकलों का दौर जारी है। कहा जा रहा है कि आरोपी को बचाने का प्रयास कतिपय रसूकदारों द्वारा किया जा रहा है। जबकि बीएमओ डां शांतनु दीक्षित द्वारा इस मामले की रिपोर्ट थाना देहात में दर्ज करा दी गई है। थाना प्रभारी द्वारा यह पहला मामला नहीं है, जिसमें ढील दी जा रही है। ग्रामीणों ने पुलिस अधीक्षक प्रशांत खरे से इस मामले में संज्ञान लेने पर जोर दिया है। यहां बता दें कि विधायक राकेश गिरी ने भी इस मामले में सख्त कार्रवाई करने का भरोसा दिलाया था। घटना के संबन्ध में डां शांतनु दीक्षित ने बताया कि छापामारी के दौरान मिली गड़बडिय़ों एवं अन्य दस्तावेज थाना देहात पुलिस को उपलब्ध करा दिये गये थे, अब तक मामला दर्ज क्यों नहीं किया गया, इस बारे में कुछ नहीं कहा जा सकता। यह तो थाना प्रभारी ही बता सकेंगे। इस संबन्ध में थाना देहात प्रभारी का कहना था कि केवल आवेदन पर एफआईआर थोड़े ही हो जाएगी, जबकि उन्हें छापामारी के दौरान मिली दवायें उपलब्ध करा दी गई थीं। थाना प्रभारी गंभीर मामलों पर पर्दा डालने का लगातार प्रयास करते आ रहे हैं। यहां बता दें कि इसी प्रकार का एक और मामला लेन-देन को लेकर बताया गया है, जिसमें अब तक संतोषजनक कार्रवाई नहीं की गई है। मरीजों के साथ खिलवाड़ करने वालों और शासन को चूना लगाने वालों के खिलाफ कार्रवाई करने में बरती जा रही ढील को लेकर ग्रामीणों में नाराजगी देखी जा रही है।
डाक्टर पिता करते मिले थे रोगियों का इलाज
अंग्रेजी दवाएं वो भी अस्पताल की हों, और उन्हें कोई प्राईवेट या फर्जी डाक्टर मरीजों को देकर मुनाफा कमाने में लगा हो, तो फिर क्या कहा जाए। मुनाफाखोरी करने वाले और मरीजों कि जिंदगी के साथ खिलवाड़ करने वालों की कमी नहीं है। कुछ इसी तरह का एक मामला पिछले दिनों 26 अगस्त को निकटवर्ती नगर पंचायत क्षेत्र कारी में सामने आया था, जहां अचानक हुई छापामारी के बाद जो तथ्य सामने आये हैं, उन्होंने लोगों को चौंका दिया था। मजे की बात तो यह है कि इस मामले में अब तक एफआईतक नहीं की गई और आरोपी को बचाने के लिये रसूकदारों की कतार लगी हुई है। हालांकि विधायक राकेश गिरी ने भरोसा दिलाया था कि जालसाजी करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा। बताया गया है कि बीएमओ बड़ागांव शांतनु दीक्षित कर्मचारियों के साथ शिकायत मिलने पर छापा मारने पहुंचे थे। 26 अगस्त को दोपहर एक बजे के लगभग जब वह वहां पहुंचे, तो डाक्टर के पिता शिखरचंद जैन ने अपने क्लीनिक का शटर डाउन कर लिया था। जब उन्होंने शटर नहीं खोला, तो डाक्टर श्री दीक्षित द्वारा पुलिस की मदद ली। थाना देहात पुलिस के पहुंचने के बाद शटर खुलवाया गया। शटर खुलवाने पर छापामार टीम ने पाया कि वह हौम्यौपैथिक दवाओं की जगह अंग्रेजी दवाओं से मरीजों का इलाज कर रहे थे।
सरकारी दवाएं देकर ऐंठ रहा था पैसा
नगर पंचायत क्षेत्र कारी में आरोपी शिखरचंद जैन के पुत्र डाक्टर हैं और यहां पिता शिखरचंद जैन मरीजों का इलाज करते हैं। 26 अगस्त को मौके पर जो दवाईयां पाई गई, वह शासकीय अस्पताल की निकलीं। बताया गया है कि उनका एक पुत्र प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र जतारा में पदस्थ है, संभवत: यह दवाईयां जतारा से ही यहां लाई जाती रही हैं। इस संबन्ध में भी अब तक कोई पूंछतांछ न करना संदेह को जन्म दे रहा है। यह दवाईयां कहां से जुटाई जाती हैं, इस संबन्ध में भी अब तक कोई ठोस खुलासा नहीं किया जा सका है। डाक्टर श्री दीक्षित ने मौके पर तथाकथित डिस्पेंसरी को शील कर दिया था। बताया गया है कि यह डिस्पेंसरी पुत्र के नाम पर पिता चला रहा था। डॉक्टर की दुकान को बीएमओ श्री दीक्षित ने शिकायत मिलने पर सील कर दिया गया था। उन्होंने मौके पर पंचनामा आदि तैयार कर वैधानिक कार्रवाई की, लेकिन बाद में क्या हो रहा है, जलेबी सीरा कहां पी रही है, यह खुलासा नहीं हो सका है, अब देखना है कि मरीजों की जिंदगी से खिलवाड़ करने वाले और सरकारी दवाओं का पैसा बसूलने वालों के खिलाफ क्या कार्रवाई की जाती है। इस परिवार में शासकीय कर्मचारियों का इस डिस्पेंसरी से क्या लेना-देना है, क्या वह इस सांठगांठ और गोरखधंधे में शामिल हैं, यह पता लगाना और उनके विरूद्ध भी सख्त कार्रवाई करने की आवश्यकता महशूस की जाने लगी है। यहां मिली दवाओं को जप्त कर लिया गया है। छापामारी के दौरान मौजूद मरीजों से भी पूंछतांछ की जानी चाहिये।
एक-दूसरे के पाले में उछाली जा रही गेंद
जिला अस्पताल प्रशासन की टीम ने छापामारी कार्रवाई कर निश्चित ही मरीजों के साथ किये जा रहे खिलवाड़ को रोकने में जहां कामयाबी हासिल की है, वहीं दूसरी ओर गोरखधंधे पर भी विराम लगाया है। श्री दीक्षित ने कहा है कि पुलिस थाना देहात को रिपोर्ट दर्ज करा दी गई है, लेकिन थाना प्रभारी देहात बृजेश तिवारी का कहना है कि डाक्टर श्री दीक्षित के न आने के कारण एफआईआर नहीं हो सकी है, जबकि दस्तावेज सभी तैयार हैं। वहीं इस संबन्ध में एसडीओपी बीडी त्रिपाठी ने कहा है कि मामले में जानकारी ली जाएगी, जल्दी ही जो उचित होगा, कार्रवाई की जाएगी। मामला जो भी हो, लेकिन इतना तो तय है कि मामले में विलंब किया जा रहा है, जिससे लोगों में अटकलों का लगना भी स्वभाविक है। बर्जन लेने के साथ ही इस मामले में सरगर्मियां तेज हो गई हैं। उम्मीद की जा रही है कि देर शाम तक मामला दर्ज हो सकता है।

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