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Saturday, August 13, 2022
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मैदान में आये भिंडिया, बचाई पुलिस की साख, चौकी से हुई थी बाइक चोरी

जिला ब्यूरो/मनोज सिंह

तहकीकात-
…और जब झूठ बोलकर अपनी पीठ थपथपाने में जुटी पुलिस
मजना चौकी से चोरी गई बाइक लिधौरा टीआई ने की दिगौड़ा से बरामद, आरोपी गिरफ्तार।

टीकमगढ़। हाल ही में हुये एक अपहरण के मामले की सच्चाई पर पर्दा क्या डला। सच्चाई को झुपाने में पुलिस विभाग में झूठ और मनगढ़ंत कहानी गढऩे का सिलसिला सा शुरू हो गया है। जिन्हें सजा मिलनी चाहिये थी, वो तो नहीं मिली। आने वाले 15 अगस्त पर सम्मान पाने की जुगाड़ जरूर शुरू हो गई है। यदि सच्चाई का पता लगाया जाए, तो बल्देवगढ़ पुलिस के हाथों में केवल असफलता ही हाथ लगी है। मामलों को दबाने और आरोपियों को बचाने में भी आजकल हुनर हासिल होती जा रही है। हद तो उस समय हो गई, जब चौकी से चोरी गई बाइक बरामद होने के बाद इसमें भी वाहवाही लूटने के लिये कई लोग आगे आ गये। कुछ नाम तो ऐसे भी हैं, जो उस दिन मध्यप्रदेश से ही बाहर थे। नाम भी जल्दी ही उजागर किये जाएंगे। पुलिस विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों को चाहिये कि वह अपराधियों से ही नहीं अपने मातहतों से भी सच उगलवाने का प्रयास करें, नहीं तो आने वाले समय में जो पुलिस अधिकारी काम करने और पुलिस की शाख बचाने में लगे हैं, वह भी हाथ पर हाथ धरके बैठ जाएंगे। जो न तो विभाग के हित में होगा और न ही जनता के। थाना ्रप्रभारी दिगौड़ा ने बताया घटना के संबन्ध में बताया कि रात्रि दस बजे के लगभग रिमझिम वारिश हो रही थी, इस दौरान लिधौरा थाना प्रभारी हिमांशु भिंडिया एवं मजना चौकी प्रभारी यहां आए, उनके साथ यहां से आरक्षक हीरा चौहान, शिवा चाहर को भेजा गया। दिगौड़ा बस्ती में घुसयाना मुहल्ला निवासी धनीराम यादव के यहां पहुंचे। उन्होंने केवल इतना ही बताया और कहा कि वह तो नहीं लेकिन थाना प्रभारी श्री भिंडिया जी के साथ उनके स्टाफ के दो सिपाही जरूर गये थे। आरक्षक हीरा चौहान ने घटना स्थल की जानकारी देते हुये बताया कि टीआई लिधौरा हिमांशु भिंडिया और चौकी प्रभारी मनोज यादव यहां आये, तो टीआई हिमांशु चौबे के निर्देश पर वह और एक अन्य आरक्षक शिवा चाहर उनके साथ बोलेरो क्रमांक एमपी 16 टी 1299 से पहुंचे। इसी के साथ स्कार्पियों वाहन से कुछ ही देर में चौकी प्रभारी खिरिया नीतू सिंह धाकड़ और नीरज लोधी व अन्य कर्मचारी भी दिगौड़ा पहुंच गये। अंबेडकर तिगैला से बस्ती की ओर जाने वाले मार्ग पर रात्रि में वाहन रवाना हुआ। जैसे ही यह वाहन घुसयाना मुहल्ले में पहुंचा कि वहां धनीराम यादव के मकान के सामने जाकर रूकी। वहां पहुंचकर आवाज दी गई,तो उनकी बच्ची ने आकर बात की। इसके बाद पुलिस ने परिजनों के सामने ही घर की तलाशी ली। जैसे ही पुलिस घर के अंदर पहुंची, तो धनीराम यादव के आंगन में मजना चौकी से चोरी गई बाइक रखी मिली। जो कपड़े से ढकी हुई थी। पल्सर बाइक एमपी 03 ए 8312 को मौके से बरामद कर ली गई और उसे चौकी प्रभारी मनोज यादव अपने साथ चौकी मजना ले आये। इस दौरान सूत्रों से जो पुख्ता जानकारी मिली है, बाइक बरामद करने में लिधौरा पुलिस का सराहनीय योगदान रहा है। इस थाने के मुखबिर से ही टीआई लिधौरा हिमांशु भिंडिया के प्रयासों से सूचना हासिल की जा सकी।
डिजायनर पत्रकारों ने फिर बनाया हाथ-
सूत्रों ने बताया है कि घटना के आरोपी भानसिंह यादव निवासी पनयारा खेरा एवं एक अन्य आरोपी जो उसके साथ था, का नाम प्रकाश में आया है, जिसे पुलिस खोजने में लगी है। एक अन्य थाने के टीआई द्वारा वाहवाही गलत तरीके से लूटने के कारण यह तहकीकात करना पड़ी और सारी कहानी को उजागर किया जा रहा है। मुखबिर का नाम प्रकाशित करना उचित नहीं है, अन्यथा वह भी प्रकाशित किया जाता। डिजायन पत्रकारों की बढ़ती भीड़ में मामलों की सत्यता पर जिस तरह से पर्दा डाला जाकर अपने खास लोगों को झूठी वाहवाही दिलाने का काम किया जा रहा है, उस पर मीडिया जगत भी शर्मिन्दा होने लगा है। बाइक चोरी के मामले को ज्यादा तूल नहीं दिया जाना और बाइक बरामद होने के बाद घर बैठे और यूपी में घूमने वालों को श्रेय दिया जाना लोगों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है।
आदेश की तामीली तो हो नहीं सकी…..?
जिला कलेक्टर सुभाष द्विवेदी द्वारा बाइक चोरी करने वाले आरोपी भानसिंह यादव निवासी पनियारा खेरा के एक भाई का जिला बदर किया गया था, जिसका आदेश तामील अब तक नहीं हो सका है। या यूं कहें कि आदेश तामील किया नहीं जा रहा है, तो गलत नहीं होगा। आरोपियों को राजनैतिक संरक्षण मिलने की चर्चाएं भी आम हैं। यह कहना पाना मुश्किल है कि इनके संबन्ध किस पार्टी के और किस नेता से हैं। हालांकि यह पता कर पाना पुलिस के लिये मुश्किल नहीं है। पुलिस चौकी से बाइक चोरी जाने का यह मामला बीती एक तारीख को प्रकाश में आया था, जब मजना चौकी से शाम को अज्ञात चोर पुलिस की ही पल्सर बाइक क्रमांक एमपी 03 चोरी कर ले गये थे। इस घटना के पांच दिन बाद भी पुलिस विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा लापरवाह कर्मचारियों को न तो लाइन हाजिर किया गया, और न ही उनका इंक्रीमेंट तक रोका गया। यदि उन्हें लापरवाही की सजा न देकर आने वाले 13 अगस्त को पुरस्कार भी दिया जाता है, तो अतिश्योक्ति नहीं होनी चाहिये। अब देखना यह होगा कि आईजी एवं डीआईजी अपने विभाग की साख को बट्टा लगाने वालों पर क्या कार्रवाई करते हैं। यह मामला बल्देवगढ़ थाने की मजना पुलिस चौकी का है, जो इलाका संवेदनशील माना जाता रहा है। एसडीओपी श्री त्रिपाठी के चुनाव में व्यस्त होने के कारण इस संबन्ध में जानकारी नहीं मिल सकी। हालांकि पूंछे जाने पर टीआई हिमांशु भिंडिया लिधौरा, नीतू सिंह धाकड़ चौकी प्रभारी खिरिया ने इस कार्रवाई को दिगौड़ा पहुंचकर कार्रवाई को अंजाम देने और चोरी गई वाइक को बरामद करने की बात को स्वीकार किया गया है।

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