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Monday, August 15, 2022
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भये प्रगट गोपाला दीनदयाला यशुमति के हितकारी

Unnao: पूर्व प्रधानाचार्य शिवप्रसाद पाण्डेय इंटर कालेज पड़री कला  रामेश्वर प्रसाद शुक्ल  के प्रांगण में तीन दिन से अनवरत चल रही श्रीमद्भागवत कथा में ब्यास आदरणीय अरविंद कुमार द्विवेदी वृंदावन वाले की मधुर वाणी सुनने को समस्त ग्रामीण व क्षेत्रीय लोग ,गणमान्य अतिथि उपस्थित हुए। उन्होंने कथा का श्रवण कर जीवन को धन्य बनाने क़ा प्रयास किया क्योंकि कहा जाता है कि भावना व प्रेम से ही भगवान मिलते है। फिर जिसको भगवान मिल जाए उसका जीवन धन्य हो जाता है । इसी कड़ी को सार्थक करने के लिए आज की कथा में प्रधान संघ अध्यक्ष प्रतिनिधि अमित त्रिवेदी,भूतपूर्व प्रधान प्रतिनिधि रोहित शुक्ल,प्रधानाध्यापक कम्पोजिट सन्तोषीनन्दन शुक्ल,हरिकृष्ण शुक्ल शिक्षक,अनिल मिश्र, नागेश बाजपेयी, विजय कुमार बाजपेयी, अंकित सिंह टीम अनिल सिंह सक्रिय कार्यकर्ता,सुनीत शुक्ल, बच्चा सिंह,सोनू सिंह,सुधीर शुक्ल,राजा शुक्ल,फुंन्नर शुक्ल,नित्या ,निधी शुक्ल, अनन्य शुक्ल,प्रबेश दीक्षित, भगवान दीन कुशवाहा, कमलेश बाजपेयी, अनुज उर्फ मंयक बाजपेयी, पोषण यादव ,कृष्णगोपाल द्विवेदी व अन्य बहुत से ग्रामीण व गणमान्य उपस्थित हुए । जिसमे आज की कथा में श्रीकृष्ण जन्म मथुरा का मनमोहक वृतांत सुनाकर ब्यास द्विवेदी जी ने समा बांध दिया ।आप सब भी जीवन को धन्य बनाने हेतु कथा मे अवश्य उपस्थित हो।

 

भये प्रगट गोपाला दीनदयाला यशुमति के हितकारी।

हर्षित महतारी सुर मुनि हारी मोहन मदन मुरारी ॥

कंसासुर जाना मन अनुमाना पूतना वेगी पठाई।

तेहि हर्षित धाई मन मुस्काई गयी जहाँ यदुराई॥

तब जाय उठायो हृदय लगायो पयोधर मुख मे दीन्हा।

तब कृष्ण कन्हाई मन मुस्काई प्राण तासु हर लीन्हा॥

जब इन्द्र रिसायो मेघ पठायो बस ताहि मुरारी।

गौअन हितकारी सुर मुनि हारी नख पर गिरिवर धारी॥

कन्सासुर मारो अति हँकारो बत्सासुर संघारो।

बक्कासुर आयो बहुत डरायो ताक़र बदन बिडारो॥

तेहि अतिथि न जानी प्रभु चक्रपाणि ताहिं दियो निज शोका।

ब्रह्मा शिव आये अति सुख पाये मगन भये गये लोका॥

यह छन्द अनूपा है रस रूपा जो नर याको गावै।

तेहि सम नहि कोई त्रिभुवन सोयी मन वांछित फल पावै॥

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