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Wednesday, September 28, 2022
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बेटा डाक्टर और इलाज करता मिला पिता, सरकारी दवाएं देकर ऐंठ रहा था पैसा

मनोज सिंह/जिला ब्यूरो

होम्योपैथी के स्थान पर करते आ रहे थे एलोपैथी इलाज

टीकमगढ़। अंग्रेजी दवाएं वो भी अस्पताल की हों, और उन्हें कोई प्राईवेट या फर्जी डाक्टर मरीजों को देकर मुनाफा कमाने में लगा हो, तो फिर क्या कहा जाए। मुनाफाखोरी करने वाले और मरीजों कि जिंदगी के साथ खिलवाड़ करने वालों की कमी नहीं है। कुछ इसी तरह का एक मामला निकटवर्ती नगर पंचायत क्षेत्र कारी में सामने आया है, जहां अचानक हुई छापामारी के बाद जो तथ्य सामने आये हैं, उन्होंने लोगों को चौंका दिया है। बताया गया है कि बीएमओ बड़ागांव शांतनु दीक्षित कर्मचारियों के साथ शिकायत मिलने पर छापा मारने पहुंचे। दोपहर एक बजे के लगभग जब वह वहां पहुंचे, तो डाक्टर के पिता शिखरचंद जैन ने अपने क्लीनिक का शटर डाउन कर लिया। जब उन्होंने शटर नहीं खोला, तो डाक्टर श्री दीक्षित द्वारा पुलिस की मदद ली गई। थाना देहात पुलिस के पहुंचने के बाद शटर खुलवाया गया। शटर खुलवाने पर छापामार टीम ने पाया कि वह हौम्यौपैथिक दवाओं की जगह अंग्रेजी दवाओं से मरीजों का इलाज कर रहे थे। इतना ही नहीं डाक्टर पुत्र है और यहां पिता शिखरचंद जैन मरीजों का इलाज करते हैं। मौके पर जो दवाईयां पाई गई, वह शासकीय अस्पताल की बताई जा रही हैं। बताया गया है कि उनका एक पुत्र प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र जतारा में पदस्थ है, संभवत: यह दवाईयां जतारा से ही यहां लाई जाती रही हैं। यह जांच और पूंछतांछ के बाद ही खुलासा हो सकेगा, कि यह दवाईयां कहां से जुटाई जाती हैं। डाक्टर श्री दीक्षित ने मौके पर तथाकथित डिस्पेंसरी को शील कर दिया है। बताया गया है कि यह डिस्पेंसरी पुत्र के नाम पर पिता चला रहा था। डॉक्टर की दुकान को बीएमओ श्री दीक्षित ने शिकायत मिलने पर सील कर दिया है। बताया गया है कि उन्होंने मौके पर पंचनामा आदि तैयार कर वैधानिक कार्रवाई आरंभ कर दी है। अब देखना है कि मरीजों की जिंदगी से खिलवाड़ करने वाले और सरकारी दवाओं का पैसा बसूलने वालों के खिलाफ क्या कार्रवाई की जाती है। इस परिवार में शासकीय कर्मचारियों का इस डिस्पेंसरी से क्या लेना-देना है, क्या वह इस सांठगांठ और गोरखधंधे में शामिल हैं, यह पता लगाना और उनके विरूद्ध भी सख्त कार्रवाई करने की आवश्यकता महशूस की जाने लगी है। यहां मिली दवाओं को जप्त कर लिया गया है। छापामारी के दौरान मौजूद मरीजों से भी पूंछतांछ की जानी चाहिये। जिला अस्पताल प्रशासन की टीम ने छापामारी कार्रवाई कर निश्चित ही मरीजों के साथ किये जा रहे खिलवाड़ को रोकने में जहां कामयाबी हासिल की है, वहीं दूसरी ओर गोरखधंधे पर भी विराम लगाया है। श्री दीक्षित ने कहा है कि इस मामले में निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

 

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