Friday, August 12, 2022
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नगर पालिका की कार्यशैली पर उठे सवाल

मनोज सिंह/जिला ब्यूरो

नगर पालिका की कार्यशैली पर उठे सवाल
सॉड की दहाड़ से दहल उठते लोगों के दिल, दहशत में हैं लोग
181 पर की शिकायत, परिणाम रहा शून्य, अफसर उदासीन।

टीकमगढ़।  बच्चों का स्कूल जाना, महिलाओं का बाहर निकलना और तो और लोगों का बाजार और दफ्तर जाना यहां के कुंवरपुरा मार्ग में आसान नहीं है। इन तमाम लोगों में सबसे ज्यादा यदि कोई परेशान है, तो वह हैं हमारे यहां के बुंदेली कवि राजेन्द्र बिदुआ…। जिनके पीछे वह हाथ धोकर नहीं नहा धोकर पड़ा है। उनके दरवाजों को क्षतिग्रस्त कर दिया और सुबह से ही उनका पीछा करता रहता है। बीमा कंपनी में कार्यरत बिदुआ जी का पालसी करने के लिये निकलना तक अब कठिन होता जा रहा है। उन्होंने तो चुटकी लेते हुये यहां तक कहा कि यह सॉड किसी के इशारे पर यहां भेजा गया है, शायद किसे को उनकी कोई रचना पसंद नहीं आई और वह उनसे खफा है। उन्होंने तो इस सॉड से परेशानी का जिक्र 181 पर तक कर डाला, लेकिन उनकी समस्या अभी भी ज्यौ की त्यौ बनी हुई है। यहां कुंवरपुरा मार्ग पर शहर के जाने माने अस्पताल हैं, जहां गर्भवती महिलाओं और अन्य मरीजों का ले जाना आम बात है। इतना ही नहीं इसके साथ ही यहां की अनेक कालोनियों में हजारों लोग निवास करते हैं, जिनका यहां से निकला आम बात है। एक सॉड ने सारे इलाके में दहशत फैला रखी है। नगर पालिका है कि इस सॉड के साथ ही आवारा पशुओं को लेकर बेफिक्र बनी हुई है। यहां यह बताना भी जरूरी है कि अब तक यहां आवारा पशुओं ने अनेक महिलाओं और बुजुर्गों को मौत के मुंह तक धकेल दिया, हजारों रूपये लोगों के इलाज में गये,तब कहीं जाकर जिंदगी बच सकी। सडक़ों और चौराहों पर आवारा पशुओं की कतारें जहां-तहां आसानी से देखने को मिल जाती हैं। कटरा बाजार, गांधी चौराहा, सैल सागर मुहल्ला, सिंधी धर्मशाला, पुरानी टेहरी, पानी की टंकी, बस स्टेंड मार्ग, नरैया मुहल्ला सहित अधिकांश इलाकों में आवारा पशुओं की भरमार है। इन पर काबू पाने के लिये न तो कोई अभियान चलाया गया, और नहीं यातायात व्यवस्था सुधारने की दिशा मेें किसी प्रकार की पहल की गई है। जिंदगी और मौत के बीच अनेक लोग आवारा पशुओं के कारण ही झूल रहे हैं। इतना ही नहीं अब तक तीन से अधिक लोगों को शहर में गधे भी काट चुके हैं, जिनकी हालत लंबे समय तक नाजुक बनी रही। आवारा सॉडों की संख्या में अब सैकड़ों में नहीं हजारों में बनी हुई है। श्री बिदुआ जी ने बताया कि उन्होंने 24 जुलाई को सीएम हैल्प लाइन पर भी आवारा सॉड को लेकर शिकायत की थी। उन्होंने शिकायत वापस भी नहीं ली, लेकिन मैसिज आ गया कि आपकी समस्या हल कर दी गई है। यहां के अधिकारियों ने शासन को भी गुमराह कर दिया। इसकी पुन: शिकायत 28 जुलाई को की गई, लेकिन अब तक यह सॉड उनके पीछे पड़ा हुआ है। अब यह किसने और क्यों छोड़ रखा है, इसको लेकर भी तरह तरह के कयास लगाकर लोग आनंद ले रहे हैं।

 

गौ शालाएं बनी नुमायशी

शासन का करोड़ों रूपये गौशालायें बनाने में खर्च भले ही हो गया हो, लेकिन इन गौ शाला संचालकों द्वारा गौ सेवा से अधिक निजी लाभ को ज्यादा तब्बजों दी जा रही है। गौ शालाओं से गौवंश को बाहर निकाल दिया जाता है। उनके खाने पीने का इंतजाम भी कोई खास नहीं है। शासन की मंशा पर पानी फेरने में जिले की गौशालायें पीछे नहीं है। कवि राजेन्द्र बिदुआ की मानें तो प्रदेश सरकार भ्रष्टाचार खत्म करने का वादा करके भ्रष्टाचार और कमीशनखोरी को बढ़ावा दे रही है। नगर पालिका अधिकारी से लेकर प्रशासनिक अधिकारियों तक ने अब तक उनकी गुहार नहीं सुनी, जिस कारण कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है। यदि किसी बच्चे या बुजुर्ग के साथ कोई बड़ी घटना होती है, तो इसके लिये जिम्मेदार कौन होगा, यह भी एक यक्ष प्रश्र है।

बिल पूरा, जल सप्लाई अधूरी

नगर पालिका आवारा पशुओं की अनदेखी करने में ही अब्बल नहीं है, वह नगर में जल सप्लाई बिगाडऩे में अब्बल है। पूरे एक माह का बिल देने के बाद भी आधे शहर को पीने का पानी नसीब नहीं हो रहा है। उनकी गुहार सुनने के लिये कोई तैयार नहीं है। मजे की बात तो यह है कि जल सप्लाई करने वाले कर्मचारी ही अपनी मनमानी करने में पीछे नहीं है। मुहल्लों में नल कब आ जाए और कब चला जाए, कहा नहीं जा सकता। नल सप्लाई का कोई समय निर्धारित नहीं है। लोगों का कहना है कि नल के इंतजार में उनका सारा दिन खराब जाता है। इसकी भी कोई गारंटी नहीं है कि नल आएंगे। नल जल सप्लाई की समय सारणी जारी करने में ही प्रशासन अब तक आना कानी करता आ रहा है। लोगों की बुनियादी समस्याओं की अनदेखी करना तो जैसे आम हो गया है। बिल पूरा लेने वालों को चाहिये कि कम से कम माह में जितने दिन नल आते हैं, उतने दिन ही कम से कम सभी के नलों में पानी तो आए। अनेक लोगों के नलों में तो पिछले कई महीनों से पानी नहीं आया। अनेक लोग शिकायतें करते रहते हैं। सप्लाई के दौरान प्रेसर ठीक से नहीं बनने से भी लोगों को परेशानी होने लगी है।

वर्षों से शहर में डलीं हैं पुरानी पाइप लाइनें

नगर पालिका परिषद समस्याओं की अनदेखी करने में खास रूचि दिखा रहा है। लाखों रूपये का बजट खुर्द बुर्द किया जाता है, जबकि समस्याएं यथावत बनी हुई हैं। शहर में पाईप लाईने वर्षों से पड़ी हुई हैं, जिनमें जगह-जगह लीकेज बने रहते हैं। सडक़े पानी बहने के कारण बनते ही बर्बाद होने लगती है। पानी की टंकी के पास ही लीकेज की समस्या अब तक स्थाई रूप से हल नहीं हो सकी है। इसके साथ ही कोतवाली के पास पानी का बहना आम है। नगर पालिका परिषद कार्यालय का अपना भवन भले ही सर्वसुविधा युक्त बन गया हो, लेकिन उस कार्यालय में बैठने वाले अधिकारी कर्मचारी शहर से बेखबर बने हुये हैं। गंदगी, मच्छर को प्रकोप, फिटकरी का अभाव, बजबजाती नालियां, स्ट्रीट लाइट खराब जैसी समस्याएं तो अब लोगों ने बताना भी बंद कर दिया है।

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