Saturday, July 2, 2022
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दिगौड़ा Police की मेहरबानी से बचा था आरोपी

टीकमगढ़। देर आए दुरूस्त आये…यह कहावत तो सुनी थी, लेकिन उसे चरितार्थ होते लोगों ने कम ही देखा होगा। पुलिस(Police) के रवैये ने भले ही फरियादी को मायूस किया, लेकिन न्यायालय से उसे अंतत: राहत मिली। घटना के 21 माह बाद ही सही, लेकिन अब तक हत्या के प्रयास के मामले में कानून से बचता आ रहा आरोपी आखिरकार कानून के शिकंजे में आ ही गया। पुलिस और आरोपी के बीच सांठगांठ के आरोपों की कलई खुल गई, साथ ही बचाये गये आरोपी को न्यायालय ने आरोपी माना। अब उसके खिलाफ भी धारा 307 का मामला चलेगा। बताया गया है कि आरोपियों व पुलिस की सांठगांठ के कई मामले अक्सर सामने आते रहते हैं, जिनमें न्याय दिलाने की कसम खाने वाली पुलिस आरोपियों से सांठगांठ कर फरियादी को गुमराह करने का कार्य करती है। लेकिन ऐसे समय में न्यायालय अभी भी न्याय का मंदिर बना हुआ है, जहां फरियादी व पीडि़तों को न्याय दिलाने का कार्य किया जा रहा है।  पुलिस व आरोपियों की सांठगांठ से खुद को ठगा महसूस कर रहे टीकमगढ़ जिले के दिगौड़ा थानांतर्गत ग्राम बैदऊ निवासी दुर्ग सिंह घोष को भी चर्चित बकील भूपेंद्र विरथरे की बजह से न्यायालय में न्याय मिला है। दिगौड़ा थानांतर्गत ग्राम बैदऊ निवासी फ रियादी दुर्ग सिंह घोष ने न्यायालय के आदेश की कॉपी देते हुए बताया कि 24 अगस्त 2019 को जब बह अपने खेत से चारा लेकर घर जा रहा था, तभी गांव के ही राजेन्द्र सिंह घोष, जयहिन्द सिंह घोष एवं धर्मेंद्र सिंह घोष ने रास्ता रोककर दुर्ग सिंह घोष पर जानलेवा हमला कर दिया। जिसमें राजेन्द्र सिहं ने दुर्ग सिंह के सिर में कल्हाड़ी मारी, दूसरी कुल्हाडी जयहिंद सिंह ने मारी, जो हाथ में लगी। इसी प्रकार धर्मेन्द्र सिंह ने लाठी से मारपीट की। तभी मौके पर पीडि़त दुर्गसिंह के भाई तिलक सिंह घोष व भतीजे गजेन्द्र सिंह व लालू आ गये, जिनके द्वारा बीच बचाव किया व दिगौडा थाने जाकर एफआईआर लिखाई गई। दिगौड़ा पुलिस ने तीनों आरोपियों राजेन्द्र सिंह, धर्मेन्द्र सिंह व जयहिंद सिंह पर धारा 307 का मुकदमा भी दर्ज किया, लेकिन फि र दिगौड़ा पुलिस ने आरोपियों से सांठगांठ कर बाद में विवेचना के दौरान मुख्य अभियुक्त राजेन्द्र सिंह घोष का नाम एफआईआर से काट दिया और मात्र दो आरोपी धर्मेन्द्र सिंह व जयहिंद सिंह घोष के खिलाफ  ही अभियोग पत्र प्रस्तुत किया। तब आरोपी व पुलिस की सांठगांठ से खुद को ठगा महसूस कर रहे पीडि़त दुर्ग सिंह घोष ने अपने बकील भूपेन्द्र विरथरे के माध्यम से न्यायालय में राजेन्द्र सिंह घोष को उक्त मामले में अभियुक्त बनाने के लिये धारा 319 दण्ड प्रक्रिया संहिता की याचिका दायर की। जिस पर बकील भूपेंद्र विरथरे की ठोस व साक्ष्य आधारित लंबी जिरह के चलने के उपरांत न्यायालय ने संज्ञान लिया और अभियुक्त राजेन्द्र सिंह घोष को पुन: 307 में आरोपी बनाकर उसके विरूद्ध उक्त धाराओं में शेष दो अभियुक्तों के साथ-साथ मुकद्दमा चलाने का निर्देश दिया। इस तरह न्यायालय ने आरोपी व दिगौड़ा पुलिस की सांठगांठ पर पानी फेरते हुए पीडि़त को प्राथमिक न्याय दिलाया। जिसमे बकील भूपेंद्र विरथरे की ठोस जिरह महत्वपूर्ण रही।

रिपोर्ट- मनोज सिंह

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