Saturday, July 2, 2022
Homeउत्तर प्रदेश15 दिन के बाद दर्ज हुई पीड़ित पत्रकार की एफआईआर

15 दिन के बाद दर्ज हुई पीड़ित पत्रकार की एफआईआर

शासन को न्याय न मिलने की दशा में आत्महत्या की कही थी बात, एसपी उन्नाव के निर्देश पर दर्ज हुई एफआईआर

सफीपुर– पीड़ित पत्रकार ने आहत हो आत्महत्या की ठानी जारी किया वीडियो नही मिला न्याय तो कर लेंगे जीवनलीला समाप्त सीओ सफीपुर और एसपी उन्नाव को फोन पर दी जानकारी। जारी वीडियो में पीड़ित पत्रकार शिवा रावत ने बताया है कि उनके साथ कुरसठ ग्रामीण के प्रधान पति वीरपाल के द्वारा अभद्रता की गई थी। जाति सूचक गालियां देते हुए जानमाल की धमकी की शिकायत क्षेत्राधिकारी सफीपुर से 30 मार्च को करने के 15 दिन बीतने के बाद भी एफआईआर दर्ज न कि गयी न्याय की गुहार लगा रहे पत्रकार ने आहत हो जिले के उच्चाधिकारियों को फोन कर बताया कि मैं आत्महत्या करने जा रहा हूँ मान सम्मान सब भंग हो गया अब जीवित रहने की इच्छा नही है। जिससे पुलिस प्रशासन में खलबली मच गई, आन फानन में पीड़ित पत्रकार को कोतवाली सफीपुर बुलाकर शांत कराते हुए आरोपी पर मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। मालूम हो की पत्रकार शिवा रावत लखनऊ से प्रकाशित समाचार पत्र लोक सचेतक एवं हिंदी चैनल इंडिया18 नेटवर्क के प्रबंध सम्पादक के पद पर कार्यरत है।क्षेत्राधिकारी सफीपुर को शिकायत पत्र देकर न्याय की गुहार लगाई थी इतना नही बल्कि आसीवन पुलिस और क्षेत्राधिकारी बांगरमऊ को आई जी आर एस के माध्यम से पत्र प्रेषित किया था। लेकिन आसीवन पुलिस और बांगरमऊ क्षेत्राधिकारी ने गलत रिपोर्ट लगाकर आरोपी को बचाने का प्रयास किया इधर इस बात की जानकारी मिलते ही पीड़ित ने 4 अप्रैल को एसपी उन्नाव और मुख्यमंत्री से ईमेल और ट्विटर, समाचार पत्रों के माध्यम से न्याय की गुहार लगाई थी ,लेकिन घटना के 15 दिन बीत जाने के बाद कार्यवाई न होने से आहत होकर आत्महत्या करने की ठानकर घटना को अंजाम देने से पहले एसपी उन्नाव को फोनकर फरियाद की कहा जब न्याय ही नही मिलेगा तो जीवित रहके क्या करेंगे,ज्ञात जो कि कुरसठ ग्रामीण के सरकारी विद्यालय निर्माणा में पुरानी ईंट लगने की सूचना ग्रामीणों द्वारा पाकर खबर कवरेज के बाद खबर प्रकाशित देखकर वीरपाल ने 30 मार्च को सुबह लगभग 9:49बजे फ़ोन कर फ़ोन पर जाति सूचक गालियां देते हुए जानमाल की धमकी दी थी जिसकी शिकायत पीड़ित ने क्षेत्राधिकारी सफीपुर से 30 मार्च 2022 की थी क्षेत्राधिकारी की उदासीनता के चलते पीड़ित आत्मघाती कदम उठाने पर मजबूर हो गया था।

एक तरफ जहां मीडिया को देश को चौथा स्तंभ माना जाता है वही पत्रकारों के साथ जो हो घटनाओं पर न्याय पाने के लिए आत्मघाती कदम उठाना पड़ रहा है तो आम जनमानस का क्या होगा यह बहुत ही सोचनीय विषय है जो पुलिस की कार्यशैली के लिए अपने आप मे एक बड़ा सवाल है।

 

सफीपुर से TV भारत/the penpal news संवाददाता अरविंद तिवारी की रिपोर्ट

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