Sunday, July 3, 2022
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यूपी सरकार ने राशन कार्ड सरेंडर करने अथवा उनके निरस्तीकरण के सम्बन्ध में नही दिया कोई आदेश, सत्यापन प्रक्रिया का किया जा रहा पालन

रिकवरी के भय से लाखो लोगो ने अपना राशन कार्ड किया है सरेंडर, भ्रामक प्रचार के जरिए बनाया गया डर का माहौल

लखनऊ: यूपी सरकार की ओर से रविवार को स्‍पष्‍ट कर दिया गया है कि प्रदेश में राशन कार्ड सरेंडर करने अथवा उनके निरस्तीकरण के सम्बन्ध में कोई नया आदेश जारी नहीं किया गया है। दरअसल, बीते कुछ दिनों से ऐसी खबरें आ रही हैं कि नि:शुल्‍क राशन की सुव‍िधा लेने वाले सक्षम लोगों से रिकवरी की जा रही है. इस बीच जिन लोगों ने अपने राशन कार्ड सरेंडर कर दिए हैं।उनसे वसूली की जाएगी।

प्राप्‍त जानकारी के मुताब‍िक, राज्य के खाद्य आयुक्त सौरव बाबू ने कहा कि राशनकार्ड सत्यापन एक सामान्य प्रक्रिया है जो समय-समय पर चलती है। उन्होंने कहा कि राशन कार्ड सरेंडर करने और पात्रता की नई शर्तों के संबंध में आधारहीन प्रचार हो रहा है। सत्यता यह है कि पात्र गृहस्थी राशनकार्डों की पात्रता एवं अपात्रता के सम्बन्ध में सात अक्टूबर, 2014 के शासनादेश के मानक निर्धारित किए गए थे, जिसमें वर्तमान में कोई परिवर्तन नहीं किया गया है। उन्‍होंने यह भी बताया कि सरकारी योजना के तहत आवंटित पक्का मकान, विद्युत कनेक्शन, एक मात्र शस्त्र लाइसेंस धारक, मोटर साइकिल स्वामी, मुर्गी पालन व गौ पालन होने के आधार पर किसी भी कार्डधारक को अपात्र घोषित नहीं किया जा सकता है। इसी प्रकार राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम-2013 तथा प्रचलित शासनादेशों में अपात्र कार्डधारकों से वसूली जैसी कोई व्यवस्था भी निर्धारित नहीं की गई है। रिकवरी के संबंध में शासन स्तर से अथवा खाद्यायुक्त कार्यालय से कोई भी निर्देश निर्गत नहीं किए गए हैं।

कुछ दिनों पहले उत्तर प्रदेश के खाद्य एवं रसद राज्य मंत्री सतीश शर्मा ने निर्देशित किया था कि राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम-2013 के तहत आच्छादित सभी पात्रों को राशन निर्गत किया जाएगा। आम जनमानस में शासन के मार्गदर्शी सिद्धांतों के अनुसार पात्रता के मानकों के आधार पर राशन कार्ड सरेंडर किये जाने हेतु अपील की जाए ताकि पात्र लोगों को इसका लाभ मिल सके। उन्होंने यह स्पष्ट किया कि किसी भी प्रकार से अपात्रों के कार्ड सरेंडर करने पर उनसे वसूली नहीं की जाएगी। उन्होंने कहा कि सम्बद्ध उचित दर दुकानों का व्यवस्थापन शीघ्र किया जाय और निलम्बित उचित दर दुकानों पर शीघ्र निर्णय लेते हुए रिक्त उचित दर दुकानों की नियुक्ति की जाए।

रिपोर्ट: अर्जुन तिवारी

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