Sunday, July 3, 2022
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शासन के निर्देशों का उड़ाया मखौल, राजशाही चौपरा का हुआ निजीकरण

जिला ब्यूरो /मनोज सिंह

 

कीमती सरकारी जमीन…. दबंगों के अधीन… प्रशासन उदासीन

दबंगों के कब्जे में शहर के बीचों बीच स्थित करोड़ों की जमीन
शासन के निर्देशों का उड़ाया मखौल, राजशाही चौपरा का हुआ निजीकरण

टीकमगढ़। मुहल्ले के हजारों लोगों की एक जमाने में प्यास बुझाने के काम आने वाला सार्वजनिक चौपरा आज अपनी बर्बादी पर आंसू बहा रहा है। चौपरा की गंदगी और उसको नष्ट करने की तैयारियां की जा रही हैं। इतना ही नहीं यह नजरबाग चौपरा आज दबंगों के कब्जे में है, और शासकीय भूमि पर अतिक्रमण को हटाने वाले चुप्पी साध कर शासन के निर्देशों का मखौल उड़ाने में लगे हैं। बेंजा अतिक्रमण शहर की सबसे बढ़ी समस्या में पक्षपात और प्रशासन की मनमानी के किस्से अब सार्वजनिक होते जा रहे हैं। यहां का चौपरा और मुख्य मार्ग की वेशकीमती जमीन सरकारी होने के बाद भी अब तक दंबंगों के कब्जे में है। अब देखना है कि शासन के निर्देशों के बाद भी यह जमीन अतिक्रमण की चपेट में है। हालांकि आज हुये एसडीएम के निरीक्षण के बाद लोगों की उम्मीद एक बार फिर जगी है, देखना है कि अतिक्रमण में बनी यहां की दुकानें और चौपरा को मुक्त करने के लिये प्रशासन क्या कदम उठाता है। बताया गया है कि नजूल भूमि खसरा नंबर 674 क्षेत्रफल 6 सौ वर्गफीट पर अवैध कब्जा होने की शिकायत 2017 में की गई थी, जिसका मामना तहसीलदार न्यायलय में 2020 में निराकरण कर इसे अतिक्रमण मानते हुये राजस्व निरीक्षक को अतिक्रमण हटाने के आदेश दिये गये थे। इतना ही नहीं अतिक्रमण कारियों का जुर्माना दो हजार रूपये भी किया गया था। तत्कालीन तहसीलदार ने जमीन से बेदखली का आदेश दिया गया। 10 जून 2020 में दिये गये आदेश की अनदेखी कर राजस्व कर्मचारियों की मौन स्वीकृति ने दबंगों और असरदार लोगों के हौसले बुलंद कर दिये। मौके पर निरीक्षण के दौरान राजस्व कर्मचारियों को आज भी यहां अतिक्रमण और चौपरा पर कब्जा देखा गया है। यहां बता दें कि इस मौके का निरीक्षण पूर्व में भी पटवारी एवं अन्य अधिकारियों द्वारा किया गया, लेकिन उसे हटाने की कार्रवाई अब तक नहीं की गई। शिकायतकर्ता वहीद शाह पुत्र स्व. सत्तार शाह निवासी कुमैदान मुहल्ला टीकमगढ़ द्वारा न्याय न मिलने पर इसकी शिकायत 181 पर भी की गई थी, लेकिन राजस्व कर्मचारियों ने अतिक्रमण हटाने का आवश्वासन तो दिया, लेकिन अब तक उस पर अमल नहीं किया, और अतिक्रमणकर्ताओं को पनाह देकर वहां से चलते बनें। अब शिकायतकर्ता मायूस होकर घर बैठ गया है। श्री शाह ने कहा है कि शासकीय चौपरा और मुख्य मार्ग की जमीन को अतिक्रमण से मुक्त कराने के लिये उन्होंने लगातार संघर्ष किया, लेकिन प्रशासन से सहयोग न मिलने से वह अब मायूस हो गये हैं। यहां बढ़ते अतिक्रमण से शासन को लाखों का चूना लगाया गया है। अतिक्रमणकर्ताओं ने यहां दुकानें बना रखी है और सार्वजनिक चौपरा को निजी कब्जे में ले रखा है। यहां बता दें कि इस संबन्ध में तहसीलदार न्यायलय में अतिक्रमणकारियों ने शपथ पत्र देकर कहा था कि उनके द्वारा यहां किसी तरह का अतिक्रमण नहीं किया गया है, इसके बाद भी कई सालों से यह चौपरा और सडक़ की जमीन उनके कब्जे में है। श्री शाह का कहना है कि यहां की वेशकीमती जमीन पर कई लोग की गिद्द दृष्टि जमी हुई है, जिसे वह अपने कब्जे में करना चाह रहे हैं। समाजसेवी श्री शाह ने अपने लंबे संघर्ष की दांस्तां सुनाते हुये कहा कि सरकारी जमीन पर किये गये अवैध कब्जे को हटाने के लिये प्रशासनिक अधिकारियों को आगे न आना लंबे भ्रष्टाचार और लापरवाही की ओर संकेत कर रहा है। जबकि अब तक कई स्थानों से अतिक्रमण हटाया जा चुका है। तहसीलदार न्यायालय में लंबी लड़ाई के बाद हुये फैसले पर संबन्धित कर्मचारी अमल करने से कतराते रहे हैं। बताया गया है कि यह सारा मामला संजय, चंद्रशेखर पुत्र मनोहर राव जक्कल निवासी कुमैदान मुहल्ला द्वारा अतिक्रमण किये जाने की शिकायत पर कार्रवाई तो हुई, लेकिन अतिक्रमण अब तक हटाया नहीं गया है। चौपरा में व्याप्त गंदगी और अतिक्रमण ने मुहल्लावासियों की परेशानियों को बढ़ा दिया है।
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एसडीएम ने किया मौके का मुआयना, दिया आश्वासन
एसडीएम सीपी पटैल ने राजस्व एवं नजूल कर्मचारियों के साथ यहां नजरबाग दीवार से सटे अतिक्रमण और चौपरा का जायजा लिया। श्री पटैल ने कहा कि अतिक्रमण पाये जाने पर दोषियों के विरूद्ध कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि पूर्व में हुये फैसले की प्रति का अवलोकन कर इस संबन्ध में उचित निर्देश जारी किये जाएगे। उन्होंने कहा कि सरकारी भूमि पर किये जाने वाले अतिक्रमण को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। श्री पटैल ने कहा कि आज निरीक्षण किया गया। निरीक्षण के बाद किये गये अतिक्रमण को हटाया जाएगा। इस दौरान उन्होंने मौजूद लोगों की समस्याओं को भी सुना।
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181 की शिकायत को हटवाया और फिर…
शिकायतकर्ता शाह ने कहा है कि प्रशासन के कर्मचारियों ने मौके पर आकर जिस नाटकीय ढंग से शिकायत कटवाने का काम किया वह चौकानें वाला है। उन्हें आश्वासन दिया कि कार्रवाई की जाएगी। आज ही अतिक्रमण हटाया जाएगा। जैसे ही सीएम हैल्प लाइन पर दर्ज शिकायत को कटवाया कि आश्वासन देकर सभी कर्मचारी चलते बने। इसके बाद बस आश्वासन ही हाथ लग रहे हैं। सरकारी वेशकीमती जमीन को अतिक्रमण के चंगुल से मुक्त कराये जाने की मांग लंबे समय से की जाती रही है। इसके साथ ही तहसीलदार न्यायालय में भी मामला चला और फैसला अतिक्रमण कारियों के खिलाफ किया गया। आदेश में अधिकारी से बेदखल करने के निर्देश दिये गये। लेकिन बेदखल करना तो दूर अब तक अतिक्रमण तक नहीं हटाया गया है।
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तहसीलदार ने सुनाया था यह फैसला
तहसीलदार ने इस मामले में सुनाये फैसले में कहा कि 219568, 19.36 प्रकरण प्रस्तुत अनावेदक उपस्थित अनावेदक द्वारा कारण नोटिस का बाथ प्रस्तुत किया, जिसमें अतिक्रमण किया जाना स्वीकार/अस्वीकार किया है । अनावेदक सूचना पश्चात् अनुपस्थित रहे। उनके विरूद्ध एक पक्षीय कार्यवाही की जाती है । हल्का आरआई द्वारा प्रस्तुत रिपोर्ट से अतिक्रमण से प्रमाणित होना पाया जाता है । अत: मप्र भू-राजस्व संहिता 1959 की धारा 248-1 के अंतर्गत अनावेदक पर 2001-नैक्स रुपये अर्थदण्ड आरोपित किया जाता है तथा अतिक्रमित भूमि से बेदखल किये जाने का आदेश दिया जाता है । अनावेदक अतिक्रमित भूमि रिक्त करें। प्रवाचक एवं वालिया की नवीस अर्थदण्ड पंजी एवं सी-2 पंजी में अर्थदण्ड अंकित करें । पटवारी बेदखली रिपोर्ट प्रस्तुत करें । प्रकरण समाप्त होकर दाखिल दफ्तर हो ।

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