Sunday, June 26, 2022
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अन्याय अत्याचार अधर्म के खिलाफ लड़े और कर्मों से जीवन को श्रेष्ठ बनाया  

परशुराम का जन्म बैशाख माह के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को हुआ था इसलिए हर वर्ष परशुराम जयंती इस दिन मनाई जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भगवान विष्णु ने परशुराम के रूप में अपना 6वां अवतार लिया था। इसी वजह से इस दिन अक्षय तृतीया के साथ परशुराम जयंती भी मनाई जाती है। इस साल 3 मई को परशुराम जयंती मनाई जा रही है। भगवान परशुराम का जन्म भले ही ब्राह्मण कुल में हुआ हो लेकिन उनके गुण क्षत्रियों की तरह थे।ऋषि जमदग्नि और माता रेणुका के पांच पुत्रों में से चौथे पुत्र परशुराम थे। परशुराम भगवान भोलेनाथ के परम भक्त थे।परशुराम जी का जन्म धरती पर हो रहे अन्याय, अधर्म और पाप कर्मों का विनाश करने के लिए हुआ था।उन्हें सात चिरंजीवी पुरुषों में से एक माना जाता है। परशुराम जी का जन्म के वक्त राम नाम रखा गया था। वे भगवान शिव की कठोर साधना करते थे। जिसके बाद भगवान भोले ने प्रसन्न होकर उन्हें कई अस्त्र-शस्त्र प्रदान किए थे।परशु भी उनमें से एक था जो उनका मुख्य हथियार था। उन्होंने परशु धारण किया था इसलिए उनका नाम परशुराम पड़ गया।

 

परशुराम जी के जीवन चरित्र से मानव समाज को अन्य अधर्म और अन्य के खिलाफ लड़ने की शिक्षा मिलती है जो अधर्म और अनिल के रास्ते पर चल रहे हैं आप उनका विरोध करें उनका साथ देकर समाज में वैमनुष्यता पैदा करना ठीक नहीं।

परशुराम जी ने जाति और वर्ण से ज्यादा कर्म को महत्व दिया।

कर्म मनुष्य के जीवन का निर्माण करते हैं जीवन चरित्र के निर्धारण के लिए कर्मों को प्रधान माना गया व्यक्ति विशेष की श्रेष्ठता उसके उन्नत और श्रेष्ठ कर्मों से ही निर्धारित होती है।

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